बिहार के चार शहरों की मेट्रो परियोजना पर ब्रेक, दो साल बाद भी DPR का इंतजार
पटना : बिहार के चार प्रमुख शहरों—मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और भागलपुर—में मेट्रो रेल परियोजना की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाई है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मानी जा रही इन परियोजनाओं में शुरुआती सर्वे और व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) अध्ययन पूरा होने के बावजूद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में इन शहरों में मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना फिलहाल धीमी पड़ती नजर आ रही है।
राज्य सरकार ने शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने और तेजी से बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के उद्देश्य से इन चार शहरों में मेट्रो रेल परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया था। इसे बिहार के शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। हालांकि, परियोजना की मौजूदा स्थिति को देखकर यह स्पष्ट है कि योजना अभी प्रारंभिक चरण से आगे नहीं बढ़ सकी है।
राज्य मंत्रिमंडल ने जून 2024 में मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और भागलपुर में मेट्रो रेल परियोजनाओं से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद परियोजना के प्रारंभिक तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी राइट्स (RITES) को सौंपी गई। कंपनी को सर्वेक्षण, यातायात अध्ययन, रूट चयन और व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने का कार्य दिया गया था।
निर्धारित समयसीमा के अनुसार राइट्स को नवंबर 2024 तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी थी। हालांकि विभिन्न स्तरों पर सुझाव लेने और तकनीकी अध्ययन में अतिरिक्त समय लगने के कारण रिपोर्ट तय समय पर जमा नहीं हो सकी। बाद में जनप्रतिनिधियों, स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों से मिले सुझावों को शामिल करते हुए राइट्स ने 16 फरवरी 2025 को अपनी सर्वे और फिजिबिलिटी रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंप दी।
रिपोर्ट मिलने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का था। डीपीआर के आधार पर परियोजना की कुल लागत, निर्माण का स्वरूप, वित्तीय मॉडल, स्टेशन, ट्रैक, तकनीकी डिजाइन और कार्यान्वयन की समयसीमा तय की जानी थी। लेकिन रिपोर्ट जमा होने के कई महीने बाद भी डीपीआर तैयार करने की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, नगर विकास एवं आवास विभाग के पास फिजिबिलिटी रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद अभी तक डीपीआर तैयार करने के लिए एजेंसी के चयन या प्रक्रिया शुरू होने को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। विभागीय अधिकारी भी इस संबंध में खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। इससे परियोजना की गति को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मेट्रो परियोजना के लिए डीपीआर सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसी के आधार पर केंद्र सरकार से मंजूरी, वित्तीय सहायता और निवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। जब तक डीपीआर तैयार नहीं होगी, तब तक परियोजना निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सकता।
चारों शहरों में मेट्रो की घोषणा के बाद लोगों में काफी उत्साह था। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए मेट्रो सेवा को भविष्य की जरूरत माना जा रहा है। मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और भागलपुर जैसे शहरों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित होने से यातायात व्यवस्था में सुधार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद थी।
परियोजना के लिए रूट चयन के दौरान शहरों के प्रमुख रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, शैक्षणिक संस्थान, व्यावसायिक क्षेत्र और घनी आबादी वाले इलाकों को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया था। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से भी सुझाव लिए गए थे, ताकि मेट्रो नेटवर्क अधिक उपयोगी और व्यवहारिक बनाया जा सके।
हालांकि डीपीआर में हो रही देरी के कारण अब इस परियोजना की समयसीमा को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीपीआर तैयार होने में और विलंब होता है तो परियोजना की लागत भी बढ़ सकती है। इसके अलावा केंद्र सरकार से मिलने वाली मंजूरी और वित्तीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बड़ी घोषणाएं करने के बाद परियोजनाओं को समय पर आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि सभी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरी सावधानी से पूरा किया जा रहा है और परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
शहरी योजनाकारों का मानना है कि बिहार के बड़े शहरों में भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं को देखते हुए मेट्रो जैसी परियोजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है तो इससे यातायात दबाव कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी।
फिलहाल नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने की कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। ऐसे में मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और भागलपुर के लोगों को अभी मेट्रो परियोजना के अगले चरण का इंतजार करना होगा।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया कब शुरू करती है और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए जाते हैं। जब तक इस दिशा में स्पष्ट प्रगति नहीं होती, तब तक बिहार के इन चार शहरों में मेट्रो सेवा शुरू होने का सपना अधूरा ही दिखाई देता है।