कैमूर। कृषि प्रधान कैमूर जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में मत्स्य विभाग की ओर से सकारात्मक पहल की जा रही है। जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में जल संचयन को बढ़ावा देने के साथ अनुसूचित जाति (अजा) परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से तालाब निर्माण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से अब तक पहाड़ी क्षेत्रों में कुल 67.30 एकड़ भूमि में तालाबों का निर्माण कराया जा चुका है।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2022 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। योजना का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में जल संचयन की व्यवस्था विकसित करना है, जहां पानी की उपलब्धता और सिंचाई की समस्या ग्रामीण जीवन को प्रभावित करती है। इसके साथ ही तालाबों का उपयोग मत्स्य पालन के लिए कर अनुसूचित जाति परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

जल संचयन के साथ आजीविका का साधन

पहाड़ी इलाकों में बारिश के पानी को संरक्षित करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। वर्षा के दौरान पानी तेजी से बह जाने के कारण उसका पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता। ऐसे में तालाब निर्माण के जरिए बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर रोकने और संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

तालाबों में जल संचयन होने से आसपास के क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं, इन जलाशयों का इस्तेमाल मत्स्य पालन के लिए किए जाने से संबंधित परिवारों को नियमित आय का साधन उपलब्ध हो सकता है।

मत्स्य विभाग की यह पहल जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

2022 से चल रही है योजना

विभाग के अनुसार राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में पहाड़ी क्षेत्र में तालाब निर्माण योजना को शुरू किया था। योजना के तहत पात्र परिवारों और क्षेत्रों में तालाब निर्माण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

योजना के शुरू होने के बाद से अब तक कैमूर जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में 67.30 एकड़ में तालाब निर्माण कराया जा चुका है। इससे क्षेत्र में जल संचयन की क्षमता बढ़ने के साथ मत्स्य पालन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अजा परिवारों के लिए रोजगार का अवसर

योजना का एक प्रमुख उद्देश्य अनुसूचित जाति परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। तालाब निर्माण के बाद संबंधित परिवार मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं। इससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का साधन मिल सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों को देखते हुए मत्स्य पालन कई परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। तालाब उपलब्ध होने से मछली पालन के लिए आवश्यक बुनियादी संसाधन स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेंगे।

इससे परिवारों को रोजगार के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

बारिश के पानी को सहेजने पर जोर

कैमूर के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा जल का संरक्षण विशेष महत्व रखता है। बरसात के दौरान पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद उसे रोकने और बाद में उपयोग करने की व्यवस्था सीमित होने के कारण कई बार पानी बहकर निकल जाता है।

तालाब निर्माण के जरिए वर्षा जल को एक स्थान पर एकत्रित किया जा सकता है। इससे भूजल स्तर को बनाए रखने में भी अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिलने की संभावना रहती है। साथ ही, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जल की उपलब्धता को बेहतर बनाने में तालाब उपयोगी साबित हो सकते हैं।

मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा

तालाब निर्माण के बाद जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में मत्स्य पालन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण परिवार तालाबों में मछली पालन कर स्थानीय बाजार में उत्पादन बेच सकते हैं।

मत्स्य पालन के लिए तालाब उपलब्ध होने से परिवारों को खेती के साथ अतिरिक्त आय का विकल्प मिल सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है। योजना के माध्यम से जल संरक्षण और आर्थिक गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की कोशिश

कृषि के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करना जरूरी माना जाता है। ऐसे में मत्स्य पालन आधारित गतिविधियां ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त कमाई का माध्यम बन सकती हैं।

कैमूर में तालाब निर्माण योजना के जरिए इसी दिशा में काम किया जा रहा है। जल संरक्षण के लिए तैयार किए गए तालाबों का उपयोग यदि व्यवस्थित तरीके से मत्स्य पालन में किया जाए तो संबंधित परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।

पहाड़ी इलाकों में बढ़ेगी जल उपलब्धता

तालाब निर्माण का असर केवल मत्स्य पालन तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। जल संचयन के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को बेहतर करने में भी मदद मिल सकती है। बरसात के पानी को रोककर रखने से स्थानीय जल संसाधनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

विशेषकर ऐसे क्षेत्रों में जहां गर्मी के मौसम में पानी की कमी महसूस होती है, वहां जल संरक्षण की यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

योजना के विस्तार से बढ़ेगा लाभ

वर्ष 2022 से संचालित योजना के तहत अब तक 67.30 एकड़ में तालाबों का निर्माण हो चुका है। यदि आने वाले समय में योजना का विस्तार किया जाता है तो जिले के और अधिक पहाड़ी क्षेत्रों में जल संचयन की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

इसके साथ ही अधिक अनुसूचित जाति परिवारों को मत्स्य पालन से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत किया जा सकता है। योजना की सफलता के लिए तालाबों के नियमित रखरखाव, पानी की उपलब्धता और मत्स्य पालन की उचित तकनीक की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण होगा।

कैमूर जिले में मत्स्य विभाग की यह पहल जल संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास के दोहरे उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में कदम है। 67.30 एकड़ में निर्मित तालाब आने वाले समय में न केवल बारिश के पानी को सहेजने में मदद कर सकते हैं, बल्कि अजा परिवारों के लिए रोजगार और आय का स्थायी माध्यम भी बन सकते हैं। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और विस्तार से पहाड़ी क्षेत्रों में जल संकट कम करने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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