Patna पटना: बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में RJD नेता तेजस्वी यादव ने सत्ताधारी NDA गठबंधन और BJP पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर कर उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म कर दिया, जबकि वे पिछले लगभग दो दशकों से राज्य में सत्ता में थे।

तेजस्वी यादव ने विधानसभा में कहा कि भाजपा ने पहले ही साफ कर दिया था कि नीतीश कुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री नहीं बने रहेंगे और 2030 तक NDA गठबंधन के नेता होने के दावे के बावजूद उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में राजनीतिक स्थिरता नहीं है और पिछले पांच वर्षों में पांच सरकारें बदल गई हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रणाली कमजोर हुई है।

उन्होंने BJP और NDA की सहयोगी JD(U) की भी आलोचना की और कहा कि राज्य में नेतृत्व बदलने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक नहीं है। “चुने हुए मुख्यमंत्री को हटाया गया है और नए मुख्यमंत्री को जल्दी लाया गया है। यह बिहार की राजनीति के लिए चिंता का विषय है,” उन्होंने कहा।

तेजस्वी यादव ने नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव के समर्थक हैं और उन्हें आगे बढ़ते देख खुश हैं। हालांकि, उन्होंने चेताया कि BJP और RSS में गहरे पैठ वाले लोग सम्राट चौधरी की बढ़त से जल सकते हैं, इसलिए उन्हें सतर्क रहना चाहिए।

तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी के पिता, शकुनि चौधरी के पूर्व भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शकुनि चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ज़िंदा दफ़नाने की धमकी दी थी। यह बताता है कि BJP की शीर्ष नेतृत्व ने नए मुख्यमंत्री को मौका देकर पुराने विवाद को नियंत्रित करने की कोशिश की।

वहीं, रूलिंग पार्टी के नेताओं ने तेजस्वी यादव की बातों का विरोध किया और सदन में कुछ देर के लिए बहस में रोकावट आई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जवाब देते हुए तेजस्वी यादव के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने जोर देकर कहा, “मैं किसी स्कूल से नहीं आया। लालू यादव ने मुझे जेल भेजा। पावर किसी का हक़ नहीं है। BJP और NDA ही मेरी बढ़त का कारण हैं।”

इस दौरान सदन में विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली। तेजस्वी यादव की आलोचना ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी और राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की बात फिर से चर्चा में आ गई।

विशेष सत्र में विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच यह टकराव स्पष्ट करता है कि बिहार की राजनीति में सत्ता हस्तांतरण के बाद भी विवाद और आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

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