जंग में बंकर का काम करेगी बिहार की नई रेल लाइन योजना

Update: 2026-07-03 10:06 GMT

Bihar: केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील चिकन नेक कॉरिडोर को सुरक्षित करने के लिए बड़ी रेल परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के तहत करीब 51 हजार करोड़ रुपये की लागत से एक अंडरग्राउंड डबल रेलवे लाइन तैयार की जाएगी। इसका बड़ा हिस्सा बिहार के कटिहार और किशनगंज जिलों से होकर गुजरेगा। रेलवे के अनुसार इस पूरी परियोजना की लंबाई लगभग 170 किलोमीटर होगी, जिसमें से 45.68 किलोमीटर हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा, जबकि बाकी हिस्सा पश्चिम बंगाल के मालदा और जलपाईगुड़ी जिलों में बनेगा। यह रेल लाइन कुमेदपुर से शुरू होकर आमबाड़ी फालाकाटा तक जाएगी।

चिकन नेक कॉरिडोर केवल 20 से 25 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा मार्ग है, जो देश के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है। यह क्षेत्र नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन की सीमाओं के करीब होने के कारण सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। किसी भी संघर्ष की स्थिति में इस मार्ग के बाधित होने का खतरा रहता है, जिसे देखते हुए यह अंडरग्राउंड रेल लाइन बनाई जा रही है।

यह परियोजना पूरी तरह ब्लास्ट-प्रूफ और आपदा-रोधी होगी। इसे टनल बोरिंग मशीनों (TBM) की मदद से जमीन के नीचे तैयार किया जाएगा। इसके भीतर भविष्य में बुलेट ट्रेन चलाने की भी योजना है। साथ ही यह संरचना युद्ध या आपात स्थिति में बंकर के रूप में भी उपयोग की जा सकेगी। इस रेल लाइन में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम और 2×25 केवी इलेक्ट्रिफिकेशन शामिल हैं। इससे सेना की आवाजाही और भारी साजो-सामान की ढुलाई तेज और सुरक्षित होगी।

इस परियोजना से बिहार के किशनगंज, ठाकुरगंज और आसपास के क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी। लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार ने इस परियोजना को 2033 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसका सर्वे कार्य दिसंबर 2024 से शुरू हो चुका है और इसे भारतमाला एवं एक्ट ईस्ट पॉलिसी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

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