पटना : बिहार के प्रसिद्ध मखाना (Fox Nut) उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए अब बिहार में हाईटेक 'पॉपिंग सेंटर' स्थापित किए जाएंगे। इन आधुनिक केंद्रों के जरिए मखाने की प्रोसेसिंग, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ निर्यात को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

बिहार देश में मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। राज्य में उत्पादित मखाना अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पोषण मूल्य के कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सरकार का लक्ष्य अब इस पारंपरिक उत्पाद को 'लोकल से ग्लोबल' बनाने का है।
क्या हैं हाईटेक पॉपिंग सेंटर?
मखाना तैयार करने की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चरण 'पॉपिंग' होता है, जिसमें मखाने के बीजों को विशेष तकनीक से फुलाया जाता है। अभी अधिकांश स्थानों पर यह काम पारंपरिक तरीके से किया जाता है, जिसमें अधिक समय और श्रम लगता है।
प्रस्तावित हाईटेक पॉपिंग सेंटर में आधुनिक मशीनों और उन्नत तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे—
मखाने की गुणवत्ता बेहतर होगी।
उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
प्रोसेसिंग में लगने वाला समय कम होगा।
श्रम लागत में कमी आएगी।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
किसानों को होगा सीधा फायदा
नई व्यवस्था से सबसे बड़ा लाभ मखाना किसानों और उत्पादकों को मिलने की उम्मीद है। आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधाओं के कारण उन्हें बेहतर गुणवत्ता का उत्पाद मिलेगा, जिससे बाजार में अधिक कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग होने से परिवहन लागत भी कम होगी और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अधिक अवसर मिलेंगे।
निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
दुनिया के कई देशों में हेल्दी स्नैक के रूप में मखाने की मांग लगातार बढ़ रही है। अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और एशियाई बाजारों में भारतीय मखाना तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
हाईटेक पॉपिंग सेंटर बनने के बाद निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले मखाने का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी और विदेशी मुद्रा अर्जन में भी वृद्धि हो सकती है।
रोजगार के नए अवसर
इन आधुनिक केंद्रों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण, भंडारण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मखाना आधारित उद्योगों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
वैल्यू एडेड उत्पादों पर जोर
सरकार केवल कच्चे मखाने के उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि मखाना आधारित वैल्यू एडेड उत्पादों को भी बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इनमें—
रोस्टेड मखाना
फ्लेवर्ड मखाना
मखाना पाउडर
हेल्थ स्नैक्स
मखाना आधारित खाद्य उत्पाद
जैसे उत्पाद शामिल हो सकते हैं, जिनकी घरेलू और वैश्विक बाजार में अच्छी मांग है।
बिहार की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
मखाना बिहार की पहचान बन चुका है और हजारों किसान इसकी खेती से जुड़े हुए हैं। यदि आधुनिक प्रोसेसिंग और निर्यात व्यवस्था मजबूत होती है, तो यह राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रांडिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और आधुनिक सप्लाई चेन विकसित होने से बिहार का मखाना वैश्विक बाजार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

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