'हिंदू राष्ट्र' बयान पर मचा बवाल, बाबा रामदेव की बढ़ीं मुश्किलें

Update: 2026-07-15 09:58 GMT

मुजफ्फरपुर: उत्तराखंड स्थित पतंजलि योगपीठ के कर्ता-धर्ता और देश के जाने-माने योग गुरु बाबा रामदेव उर्फ रामकृष्ण यादव के विरुद्ध बिहार के मुजफ्फरपुर में कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। बाबा रामदेव द्वारा 'हिंदू राष्ट्र' और 'मुसलमानों' को लेकर दिए गए हालिया बयान पर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले को लेकर मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में एक औपचारिक परिवाद पत्र दाखिल किया गया है। सीजेएम कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद से बाबा रामदेव की कानूनी मुश्किलें काफी हद तक बढ़ सकती हैं। कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई 2026 की तारीख मुकर्रर की है।

यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भिखनपुर गांव के निवासी और प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी द्वारा दर्ज कराया गया है। अदालत में दाखिल किए गए परिवाद पत्र में बाबा रामदेव पर समाज में नफरत फैलाने और सामाजिक सौहार्द को गंभीर नुकसान पहुँचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिवादी तमन्ना हाशमी का साफ तौर पर आरोप है कि बाबा रामदेव ने हाल ही में विभिन्न प्रमुख न्यूज चैनलों और सार्वजनिक मंचों पर एक समुदाय विशेष, यानी मुस्लिम समुदाय को लेकर बेहद आपत्तिजनक, अमर्यादित और विवादित टिप्पणियां की थीं। परिवादी का कहना है कि इन बयानों के प्रसारण के बाद से न केवल उनकी व्यक्तिगत भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुँची है।

परिवाद पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि बाबा रामदेव एक बेहद प्रभावशाली सार्वजनिक व्यक्तित्व हैं और समाज का एक बड़ा वर्ग उन्हें सुनता व उनका अनुसरण करता है। ऐसे में उनके द्वारा दिया गया इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना बयान देश की गंगा-जमुनी तहजीब और विभिन्न समुदायों के बीच के आपसी भाईचारे को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। परिवादी ने अदालत से गुहार लगाई है कि समाज में अशांति और विद्वेष फैलाने के इस प्रयास पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सार्वजनिक मंचों से इस तरह के विभाजनकारी बयान न दे सके।

इस मामले के कानूनी पहलुओं को देखा जाए तो मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत द्वारा इसे स्वीकार किए जाने को प्रारंभिक तौर पर बाबा रामदेव के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें 21 जुलाई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत परिवादी के दावों, गवाहों के बयानों और प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव के खिलाफ लगाए गए आरोपों के पक्ष में पर्याप्त प्राथमिक साक्ष्य पाए जाते हैं, तो कोर्ट उनके खिलाफ समन जारी कर सकती है या मामले को आगे की जांच के लिए संबंधित पुलिस थाने को सौंप सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से सार्वजनिक जीवन में बयानों की मर्यादा और धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर देश भर में एक नई बहस छेड़ दी है।

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