Bihar: सारण जिले के ऐतिहासिक चिरांद में 19वें चिरांद चेतना महोत्सव का उद्घाटन बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने किया। यह आयोजन गंगा, सरयू और सोन नदियों के संगम तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ, जहां गंगा महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग दिया।
चिरांद को बताया प्राचीन सभ्यता का केंद्र
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि चिरांद विश्व के दुर्लभ पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। उन्होंने कहा कि यहां हुए उत्खनन से प्राप्त साक्ष्य बताते हैं कि यह स्थल ऋषि और कृषि संस्कृति के समन्वय का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उनके अनुसार, चिरांद की जीवन शैली आज के समय में सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
चित्र प्रदर्शनी और सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा
मंत्री ने चिरांद उत्खनन से प्राप्त अवशेषों और इतिहास पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। इसके बाद अयोध्या मंदिर में लक्ष्मण किलाधीस महंत मैथिली रमण शरण महाराज, मौनी बाबा और अन्य संतों के साथ चिरांद की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्स्थापना को लेकर चर्चा हुई।
‘चिरांद रत्न सम्मान’ से सम्मानित विभूतियां
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को ‘चिरांद रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया। साहित्य एवं पत्रकारिता के लिए प्रो. अरुण कुमार भगत, पर्यावरण के लिए रामबिलास शाण्डिल्य, संगीत के लिए पं. रामप्रकाश मिश्र, कृषि के लिए साक्षी कुमारी और सेवा क्षेत्र के लिए डॉ. डी.के. ओझा को सम्मानित किया गया।
गंगा महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम
समारोह की शुरुआत गंगा पूजन और भव्य गंगा महाआरती के साथ हुई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगा, सरयू और सोन नदियों के संगम का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके बाद आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
इस अवसर पर विधायक छोटी कुमारी, जेपी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेई, आरएसएस के क्षेत्र कार्यवाह डॉ. मोहन सिंह, गंगा समग्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरेंद्र प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय मंत्री रामाशीष जी, पूर्व सांसद लाल बाबू राय सहित कई संत, समाजसेवी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।