'घुसपैठियों को बचा रही कांग्रेस', हिमंत सरमा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
असम: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 1 नवंबर को शिमला में बीजेपी की पदयात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी घुसपैठियों को बचाने के लिए मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) का विरोध कर रहे हैं, और इस प्रक्रिया पर उनके ऐतराज पर सवाल उठाए।
सरमा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च का नेतृत्व किया। इस दौरान उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव बिंदल, अनुराग ठाकुर और सुरेश कश्यप भी मौजूद थे। यह मार्च मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के आरोपों के खिलाफ पार्टी के देशव्यापी अभियान का हिस्सा था।
मार्च के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सरमा ने दावा किया कि राहुल गांधी SIR प्रक्रिया का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि मतदाता सूची से कथित घुसपैठियों के नाम हटा दिए गए हैं।
सरमा ने कहा, "राहुल गांधी इसलिए रो रहे हैं क्योंकि SIR प्रक्रिया के जरिए घुसपैठियों के नाम हटा दिए गए हैं। वह यह सारा ड्रामा इसलिए कर रहे हैं ताकि इन घुसपैठियों को यहां बसाया जा सके। लेकिन, इस देश की जनता कभी भी घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल नहीं होने देगी।"
उन्होंने कांग्रेस नेता पर व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा, "वह पागल हैं; उन्हें तो पागलखाने में होना चाहिए।"
असम के मुख्यमंत्री ने असम और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि कथित घुसपैठियों की पहचान करने और उनके नाम हटाने के लिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण जरूरी है।
उन्होंने कहा, "बंगाल और असम जैसे राज्यों में, सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक, सभी मानते हैं कि घुसपैठियों का मुद्दा एक हकीकत है। अगर SIR नहीं होगा, तो घुसपैठियों के नाम कैसे हटाए जा सकते हैं?"
मुगल शासकों बाबर और औरंगजेब का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि 'बाबरों और औरंगजेबों' (घुसपैठियों) को बाहर निकालने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या SIR को लेकर राहुल गांधी के ऐतराज हिमाचल प्रदेश, केरल और यहां तक कि उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली में होने वाले चुनावों पर भी लागू होने चाहिए?
सरमा ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि वह चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर अलग-अलग राज्यों में, वहां किसकी सरकार है, इसके हिसाब से विरोधाभासी रुख अपनाती है। उन्होंने कहा, "कांग्रेस से कहिए कि पहले वे अपनी सरकारों से इस्तीफा दें, फिर हमसे आकर बात करें। उन्हें लगता है कि उनकी अपनी सरकारें तो ठीक हैं, लेकिन जहां बीजेपी सत्ता में है, वहां वे कहते हैं कि वोट 'चुराए' जा रहे हैं। यह किस तरह का दोहरा मापदंड है?"
इसके अलावा, सरमा ने गांधी और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के अन्य नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने 1 नवंबर को दिल्ली में रैली करने के उनके फैसले की आलोचना की, जो 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी का दिन है।
'एक्स' (X) पर एक पोस्ट में, असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दिन राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करना सिख समुदाय के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
सरमा ने लिखा, "आप यह रैली किसी और दिन भी कर सकते थे, लेकिन शायद सिखों के प्रति असंवेदनशीलता आपके डीएनए में ही है।"
उन्होंने विपक्षी नेताओं से यह भी कहा कि वे सिख समुदाय से माफी मांगें और दंगों में मारे गए लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखें।
उन्होंने आगे कहा, "आपकी दादी की हत्या के बाद बदले की आग में, आपके पिता और उनके साथियों के नेतृत्व में 3,000 से ज्यादा सिखों का कत्लेआम किया गया था। पहले माफी मांगिए, फिर अपना कार्यक्रम जारी रखिए।"
इस बीच, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हरियाणा के रोहतक में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा का नेतृत्व किया। मुंबई में, बीजेपी और उसके महायुति सहयोगियों ने भी 'लोकशाही बचाओ, अराजकता हटाओ' (लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ) के नारे के साथ एक मार्च निकाला।
ये जवाबी मार्च तब हुए जब 'इंडिया' गठबंधन के नेता दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली के लिए इकट्ठा हुए। यह रैली मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ थी।
विपक्ष के इस जमावड़े में राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद फारूक अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, एनसीपी-एससीपी (NCP-SCP) की सांसद सुप्रिया सुले, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आरजेडी (RJD) नेता तेजस्वी यादव शामिल थे।
इन रैलियों से बीजेपी और विपक्ष के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव साफ नजर आता है, जो मुख्य रूप से मतदाता सूची में संशोधन और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर है।