कामरूप में मिले 23 प्रजातियों के चमगादड़, 115 पेड़ों पर बने हैं आशियाने
असम: असम के कामरूप जिले में हुए एक अध्ययन में चमगादड़ों के रहने (आश्रय लेने) के लिए इस्तेमाल होने वाले 115 पेड़ों की पहचान की गई है। यह अध्ययन बताता है कि तेजी से बदलते परिवेश में चमगादड़ों की आबादी को बनाए रखने में पुराने पेड़ों, बांस के झुरमुटों और यहाँ तक कि इंसानों द्वारा बनाई गई संरचनाओं की भी अहम भूमिका होती है।
26 अक्टूबर को 'जर्नल ऑफ थ्रेटन्ड टैक्सा' में प्रकाशित इस शोध में, जिले की नौ जगहों पर चमगादड़ों के रहने के 16 ठिकानों का दस्तावेजीकरण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि चमगादड़ 23 अलग-अलग प्रजातियों के पेड़ों का इस्तेमाल आश्रय के रूप में करते हैं। इसके अलावा, वे पेड़ों के खोखले हिस्सों, पत्तियों, बांस के पोरों, घरों और इमारतों की दरारों में भी रहते हैं।
गुवाहाटी विश्वविद्यालय की अनिंदिता डेका, मलाबीका काकाती सैकिया और प्रशांत कुमार सैकिया द्वारा किया गया यह अध्ययन, नवंबर 2019 से मार्च 2025 के बीच किए गए फील्ड सर्वे पर आधारित है।
अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि पेड़ों की कुल ऊंचाई और उनके तने की ऊंचाई, चमगादड़ों की संख्या को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं। शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए सांख्यिकीय मॉडल से पता चला कि चमगादड़ों की संख्या में होने वाले बदलावों में से 28.2 प्रतिशत हिस्से के लिए ये कारक जिम्मेदार हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अध्ययन में पाया गया कि स्थानीय (native) पेड़ों की तुलना में बाहरी (exotic) प्रजातियों के पेड़ों पर चमगादड़ों की संख्या काफी अधिक थी। हालाँकि, सदाबहार (evergreen) और पतझड़ वाले (deciduous) पेड़ों पर रहने वाले चमगादड़ों की संख्या में कोई खास सांख्यिकीय अंतर नहीं देखा गया।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि इंसानी बस्तियों और जल स्रोतों से दूरी बढ़ने पर चमगादड़ों की संख्या कम हो जाती है। इससे पता चलता है कि ये जगहें चमगादड़ों के रहने के स्थानों के वितरण को तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
ये नतीजे इस बात पर जोर देते हैं कि पेड़ों और चमगादड़ों के रहने के अन्य संभावित ठिकानों के प्रबंधन के तरीकों पर फिर से विचार करने की जरूरत है, खासकर तब जब इंसानी गतिविधियों के कारण प्राकृतिक परिवेश लगातार बदल रहा है। शोधकर्ताओं ने पुराने पेड़ों, खड़े सूखे पेड़ों और बांस के झुरमुटों को बचाए रखने के साथ-साथ, इमारतों और अन्य संरचनाओं में चमगादड़ों के लिए उपयुक्त आश्रय स्थलों की सुरक्षा करने पर जोर दिया है।
चमगादड़ परागण (pollination), बीजों के प्रसार और कीटों की आबादी को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करके पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालाँकि, पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में उनके रहने की जरूरतों के बारे में अभी भी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।
यह अध्ययन असम में चमगादड़ों के आवासों के बारे में हमारी वैज्ञानिक समझ को बढ़ाता है। साथ ही, यह ऐसे संरक्षण उपायों की आवश्यकता की ओर इशारा करता है, जिनमें चमगादड़ों के रहने के उन सभी ठिकानों को शामिल किया जाए जिनका वे उपयोग करते हैं—चाहे वे प्राकृतिक परिवेश में हों या इंसानों के प्रभाव वाले इलाकों में।