असम: असम भर के शिक्षकों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर नए सिरे से विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। इन मांगों में छात्रवृत्ति परीक्षाओं को फिर से शुरू करना, मिड-डे मील के लिए फंड समय पर जारी करना, स्कूल के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के लिए बेहतर फंडिंग और 8वें वेतन आयोग को लागू करना शामिल है।
यह चेतावनी 'प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष रतुल गोस्वामी ने दी। उन्होंने सोनितपुर जिले के जमुगुरीहाट में एक शैक्षिक बैठक के दौरान मीडिया से बात करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इन मांगों को पूरा नहीं करती है, तो एसोसिएशन 'ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन' (AASU) के समर्थन से अपने आंदोलन को और तेज करेगा।
गोस्वामी ने उन छात्रवृत्ति परीक्षाओं को फिर से शुरू करने की मांग की जो पहले आयोजित की जाती थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस व्यवस्था को वापस लाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये परीक्षाएं फिर से शुरू नहीं की गईं, तो शिक्षक आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
स्कूल विकास कार्यों के लिए अपनी जेब से खर्च करने का शिक्षकों ने किया विरोध
एसोसिएशन ने सरकार की उस कथित व्यवस्था का भी विरोध किया है, जिसके तहत शिक्षकों को स्कूल के विकास कार्यों के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं और बाद में वे इसकी भरपाई (रीइंबर्समेंट) की मांग करते हैं।
गोस्वामी ने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था शिक्षकों पर अनुचित वित्तीय बोझ डाल रही है, क्योंकि उन्हें एक तरह से स्कूल के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 'ठेकेदार' की भूमिका निभानी पड़ रही है।
उन्होंने मांग की कि सरकार स्कूल विकास के लिए फंड उसी तरह जारी करे जैसे पहले किया जाता था, न कि शिक्षकों से यह उम्मीद रखे कि वे अपनी निजी बचत से इन कार्यों का खर्च उठाएं।
एसोसिएशन का कहना है कि स्कूल के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी के साथ-साथ सरकार की ओर से पर्याप्त और समय पर वित्तीय सहायता भी मिलनी चाहिए।
मिड-डे मील फंड में देरी से चिंताएं बढ़ीं
गोस्वामी ने मिड-डे मील योजना के लिए फंड जारी करने में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को इससे जुड़े खर्चों को संभालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि भुगतान लंबित होने के कारण जरूरी सामान खरीदने में परेशानी आ रही है, क्योंकि स्थानीय दुकानदार अब शिक्षकों को उधार देने से कतराने लगे हैं।
एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि वह लंबित बकाया राशि का भुगतान करे और यह सुनिश्चित करे कि फंड समय पर जारी हो, ताकि इस योजना को लागू करने में आगे कोई और दिक्कत न आए।
पुरानी पेंशन योजना और कैशलेस चिकित्सा उपचार की मांग
स्कूल से जुड़े मुद्दों के अलावा, 'प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष ने शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी मांगें भी उठाईं। गोस्वामी ने उन कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को जल्द लागू करने की मांग की, जो अभी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के दायरे में आते हैं। उन्होंने शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की भी मांग की।
वेतन से जुड़े मामलों पर, उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को बिना किसी विसंगति के लागू किया जाए।
एक अन्य मांग में, गोस्वामी ने कहा कि मंत्रियों और विधायकों के वेतन को भी 8वें वेतन आयोग के दायरे में लाया जाना चाहिए, न कि उनके वेतन का निर्धारण अलग से किया जाना चाहिए।
संगठन का रुख दोहराते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक किसी भी ऐसी व्यवस्था का विरोध करेंगे, जो पर्याप्त सरकारी समर्थन के बिना उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालती हो।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। साथ ही, AASU का समर्थन मिलने से प्रस्तावित आंदोलन के और मजबूत होने की उम्मीद है।
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