Assam असम: असम के Tinsukia जिले में Brahmaputra River के किनारे तेजी से बढ़ते कटाव ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। ताज़ा हालात के अनुसार, लगभग 1,400 परिवार इस संकट की चपेट में आ गए हैं और उन्हें विस्थापन का खतरा बना हुआ है। इसी बीच, नई बाढ़ एडवाइजरी में पूरे नॉर्थईस्ट क्षेत्र में नदी के जलस्तर बढ़ने की चेतावनी दी गई है, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई है।
कटाव की सबसे ज्यादा मार दिघलतरंग टी एस्टेट क्षेत्र में देखी जा रही है, जहां Dangari Channel से आ रहे तेज़ बहाव के कारण नदी का किनारा तेजी से टूट रहा है। अधिकारियों और स्थानीय मजदूरों के अनुसार, अब तक करीब 35.48 हेक्टेयर चाय बागान की जमीन नदी में समा चुकी है। इससे हजारों चाय के पौधे नष्ट हो गए हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कटाव की रफ्तार लगातार बढ़ रही है और स्थिति हर दिन बिगड़ती जा रही है। चाय बागान से जुड़े कई महत्वपूर्ण ढांचे अब खतरे के दायरे में आ गए हैं। एस्टेट की फैक्ट्री, अस्पताल और मजदूरों के क्वार्टर कटाव लाइन से बेहद नजदीक पहुंच गए हैं, जिनमें से कुछ संरचनाएं मात्र 300 मीटर की दूरी पर हैं।
एक मजदूर नेता ने बताया कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो एस्टेट की मुख्य सुविधाएं पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं। उन्होंने कहा, “कटाव तेजी से बढ़ रहा है और हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। हमें तुरंत ठोस उपायों की जरूरत है, नहीं तो भारी नुकसान होगा।”
स्थिति ‘पुराना लाइन’ नामक रिहायशी इलाके में और अधिक गंभीर हो गई है। यहां कई घर पहले ही पानी में डूब चुके हैं और बाकी घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। प्रभावित परिवारों को अपना घर छोड़ने की आशंका सता रही है, जिससे विस्थापन का संकट गहराता जा रहा है।
प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक ठोस राहत या बचाव उपाय पर्याप्त नहीं हैं। क्षेत्र में कटाव रोकने के लिए तटबंध निर्माण और अन्य सुरक्षात्मक उपायों की मांग तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मपुत्र नदी में इस तरह का कटाव हर साल मानसून के दौरान देखने को मिलता है, लेकिन इस बार स्थिति अधिक गंभीर नजर आ रही है। जलस्तर में वृद्धि और तेज़ बहाव के कारण किनारे कमजोर हो रहे हैं, जिससे जमीन का लगातार नुकसान हो रहा है।
बाढ़ की चेतावनी के बीच प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए यह चुनौती और बढ़ गई है। यदि जलस्तर और बढ़ता है, तो कटाव की रफ्तार और तेज हो सकती है, जिससे अधिक क्षेत्रों पर खतरा बढ़ जाएगा।
स्थानीय लोगों ने सरकार से अपील की है कि जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकाला जाए और प्रभावित परिवारों के लिए राहत एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो नुकसान और अधिक बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, तिनसुकिया जिले में ब्रह्मपुत्र नदी का कटाव एक गंभीर संकट बनता जा रहा है, जिसने न केवल चाय उद्योग को प्रभावित किया है, बल्कि सैकड़ों परिवारों के जीवन और आजीविका पर भी सीधा खतरा खड़ा कर दिया है।
Tags: