Guwahati, गुवाहाटी : एआईसीसी महासचिव और असम के सह-प्रभारी मनोज चौहान ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दावा किया कि हिमंत बिस्वा सरमा पूरे देश में सबसे 'भ्रष्ट' मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा, "आज मुख्यमंत्री की संपत्ति कहां नहीं है? न केवल असम में, बल्कि पूरे भारत और यहां तक ​​कि विदेशों में भी उनकी बेहिसाब संपत्ति है ।" चौहान ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री की पत्नी, रिनिकी भुयान सरमा, असम में जहाँ भी जाती हैं, वहाँ संपत्ति कैसे खरीद लेती हैं। उन्होंने आगे कहा, "हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार कहा था कि उनके पास पैसे नहीं हैं और ज़रूरत पड़ने पर वे अपनी पत्नी पर निर्भर रहते हैं। उनकी पत्नी ने इतनी बड़ी बेहिसाब संपत्ति कैसे जमा की? क्या वे इसे अपने मायके से लाई हैं?"
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "हिमंत बिस्वा सरमा के मंत्री और बाद में मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उनकी पत्नी अचानक भारी संपत्ति और कई कंपनियों की मालिक बन गईं, जिससे कई बातें स्पष्ट हो गईं।" ज़ुबीन गर्ग मामले का ज़िक्र करते हुए चौहान ने कहा कि गायक की मौत की खबर सुनने के बाद जैसे ही उन्होंने सिंगापुर का वीडियो देखा, उन्हें शक हो गया कि यह हत्या है। लेकिन उस समय मुख्यमंत्री ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्हें यह स्वीकार करने में 75 दिन लग गए कि इस प्रसिद्ध कलाकार की हत्या हुई थी। चौहान ने कहा कि यह देरी, "मुख्यमंत्री के अधीन गृह विभाग की नाकामी को साफ़ तौर पर उजागर करती है।" चौहान ने छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग और तेज़पुर विश्वविद्यालय में चल रहे गतिरोध पर राज्य सरकार की चुप्पी पर भी टिप्पणी की। उ
न्होंने मुख्यमंत्री पर जनता
के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय तुच्छ टिप्पणियाँ करने का आरोप लगाया। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति के दर्जे के मुद्दे पर विभाजनकारी राजनीति कर रहे हैं।
चौहान ने कहा, "यह ऐसा मामला है जिस पर केवल केंद्र सरकार ही फैसला कर सकती है। लेकिन सच्चाई छिपाकर भाजपा 10-11 साल से लोगों को गुमराह करती रही है। अब जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तो मुख्यमंत्री को अचानक एसटी मुद्दा याद आ गया है।" उन्होंने आगे सवाल किया कि अगर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री असम से इतना प्यार करते हैं—जैसा कि मुख्यमंत्री अक्सर दावा करते हैं—तो वे पिछले 10 सालों से लंबित मांग को पूरा क्यों नहीं कर पाए? उन्होंने पूछा, "क्या मोदी और शाह असम के प्रति अपने प्यार को यही कहते हैं ?"
चौहान ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ़ झूठ बोलकर जनता को गुमराह करना जानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चुनाव आयोग के ज़रिए आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता में वापसी की कोशिश में लगे हैं।
अंत में, चौहान ने असम के लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया ताकि मुख्यमंत्री और भाजपा किसी भी हालत में वोट न चुरा सकें। उन्होंने सभी से यह सुनिश्चित करने की भी अपील की कि कोई भी बाहरी व्यक्ति असम के लोगों को उनके मताधिकार से वंचित न कर सके।
असम पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) जुबीन गर्ग की मौत के मामले में अदालत के समक्ष अपना आरोपपत्र पेश करने के लिए तैयार है।
एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वे अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने के लिए लगभग तैयार हैं।
दूसरी ओर, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि एसआईटी 12 दिसंबर तक आरोपपत्र दाखिल करेगी।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को दीमा हसाओ जिले के उमरांगसो में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से कहा, "उन्होंने (एसआईटी ने) मुझे बताया कि उनके पास लगभग 3,500 दस्तावेज हैं। उन्होंने इसे अंतिम रूप देने के लिए कल महाधिवक्ता के साथ बैठक की। 18 दिसंबर अंतिम तिथि है और वे 6 दिसंबर से 12 दिसंबर के बीच आरोपपत्र दाखिल करेंगे। हमें 18 दिसंबर से पहले आरोपपत्र दाखिल करना होगा। अन्यथा, जो लोग वर्तमान में जेल में हैं उन्हें जमानत मिल जाएगी।"
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "मैंने उनसे (एसआईटी से) कहा कि 18 दिसंबर तक इंतजार मत कीजिए, इसे उनके समक्ष दाखिल कीजिए।"
जुबीन गर्ग की मौत के मामले में असम पुलिस की एसआईटी/सीआईडी ​​ने अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य कार्यक्रम आयोजक श्यामकनु महंत, जुबीन गर्ग के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, संदीपन गर्ग, बैंडमेट शेखर ज्योति गोस्वामी, सह-गायक अमृतप्रवा महंत, जुबीन के पीएसओ नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य शामिल हैं।
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