नई दिल्ली : अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीनी सेना की कथित घुसपैठ और नए कब्जे की खबरों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के किसी नए इलाके पर कब्जा नहीं किया है। भारतीय सेना सीमावर्ती क्षेत्रों में पूरी मजबूती के साथ तैनात है और देश की भूमि की सुरक्षा कर रही है।
इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान रिजिजू ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में चीनी सेना के अरुणाचल प्रदेश में घुसकर भारतीय जमीन पर कब्जा करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसमें सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि सीमा पर सुरक्षा बल परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रहे हैं और किसी भी घटनाक्रम से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अरुणाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले रिजिजू ने सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय लोगों और पशुपालकों की चिंताओं को भी जायज बताया। उन्होंने कहा कि इन दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों की समस्याओं और उनकी बातों को सरकार गंभीरता से लेती है। हालांकि, चराई वाले क्षेत्रों तक पहुंचने में होने वाली परेशानी या स्थानीय लोगों की आशंकाओं को अपने आप चीनी कब्जे की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ पशुपालकों ने दावा किया था कि चीनी सैनिक उनके पारंपरिक चरागाहों तक पहुंच गए हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें प्रसारित होने लगीं। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि चीन की सेना अरुणाचल प्रदेश के भीतर काफी दूर तक आ गई है। रिजिजू ने कहा कि इस प्रकार के दावों की आधिकारिक और तथ्यात्मक जांच किए बिना उन्हें सही नहीं माना जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने स्थानीय निवासियों की शिकायत और किसी क्षेत्र पर सैन्य कब्जे के बीच अंतर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चराई के क्षेत्र तक पहुंच नहीं मिलना गंभीर चिंता हो सकती है और संबंधित एजेंसियों को इसका समाधान करना चाहिए। इसके बावजूद इसे चीन की ओर से भारतीय क्षेत्र पर नया कब्जा किए जाने के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
हाल के दिनों में अपर सुबनसिरी जिले के ताकसिंग और इसके आसपास के सीमावर्ती इलाकों को लेकर कई दावे सामने आए हैं। स्थानीय संगठनों ने भी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन करने की मांग की है। ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा करने के लिए रवाना हुआ है। संगठन स्थानीय निवासियों की समस्याओं और कथित चीनी गतिविधियों से संबंधित दावों की जानकारी जुटाना चाहता है।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी राज्य में चीनी सेना की नई घुसपैठ की खबरों से इनकार कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भारतीय सेना अंतरराष्ट्रीय सीमा की प्रभावी तरीके से रक्षा कर रही है। रक्षा अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में भी नए अतिक्रमण के दावों को अपुष्ट बताया गया है।
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा का स्पष्ट सीमांकन नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में दोनों देशों की सीमा संबंधी धारणाएं अलग हैं। इसी वजह से कभी-कभी गश्त और चराई वाले क्षेत्रों तक पहुंच को लेकर विवाद तथा अलग-अलग दावे सामने आते हैं। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत होती रही है।
चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताते हुए उसे ‘जांगनान’ कहता है। वह समय-समय पर राज्य के अलग-अलग स्थानों के नाम बदलकर अपने दावे को मजबूत करने का प्रयास करता रहा है। भारत ने चीन की इस प्रक्रिया और क्षेत्रीय दावे को हमेशा खारिज किया है। केंद्र सरकार का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा नाम बदलने से वास्तविक स्थिति नहीं बदल सकती।