वालोंग की जैव विविधता पर नई खोज 85 तितली प्रजातियों का हुआ रिकॉर्ड
पूर्वी हिमालय में प्रकृति का अनोखा खजाना वालोंग में मिलीं कई दुर्लभ तितलियां
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले के वालोंग क्षेत्र में तितलियों की विविधता को लेकर एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। यहां किए गए दो दिवसीय सर्वेक्षण में करीब 85 प्रजातियों की तितलियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। इस खोज ने पूर्वी हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को एक बार फिर उजागर किया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों की टीम ने वालोंग के पहाड़ी जंगलों, नदियों, जलधाराओं और आसपास के प्राकृतिक इलाकों में सर्वे किया। इस दौरान कई दुर्लभ और कम देखी जाने वाली तितली प्रजातियां भी कैमरे में कैद की गईं।
दुर्लभ प्रजातियां भी मिलीं
सर्वेक्षण के दौरान कई खास तितली प्रजातियों की पहचान हुई, जिनमें एम्प्रेस (Empress), चाइनीज येलो स्वॉलोटेल (Chinese Yellow Swallowtail) और फॉल्स तिब्बतन क्यूपिड (False Tibetan Cupid) जैसी प्रजातियां शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्रजातियों की मौजूदगी क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरणीय महत्व को दर्शाती है।
पूर्वी हिमालय का जैव विविधता केंद्र
अरुणाचल प्रदेश का पूर्वी हिमालयी क्षेत्र वनस्पतियों और जीव-जंतुओं की विविधता के लिए जाना जाता है। वालोंग क्षेत्र अपनी ऊंची पहाड़ियों, घने जंगलों और अनोखे पारिस्थितिकी तंत्र के कारण कई दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सर्वेक्षण भविष्य में संरक्षण योजनाएं बनाने में मदद करेंगे। तितलियां किसी भी क्षेत्र के पर्यावरणीय स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती हैं।
संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम
तितलियों की प्रजातियों का रिकॉर्ड तैयार करने से वैज्ञानिकों को उनके आवास, संख्या और पर्यावरणीय बदलावों को समझने में मदद मिलती है। इससे दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए बेहतर रणनीति बनाई जा सकती है।
प्रकृति विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों का संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता को बचाना बेहद जरूरी है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियां कई प्रजातियों के अस्तित्व पर असर डाल सकती हैं।
पर्यटन को भी मिल सकता है बढ़ावा
वालोंग में तितलियों की इतनी बड़ी विविधता सामने आने से क्षेत्र में प्रकृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। बर्ड वॉचिंग और बटरफ्लाई वॉचिंग जैसे इको-टूरिज्म गतिविधियों के जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
अरुणाचल प्रदेश पहले से ही अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इस नई खोज ने राज्य की प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यावरणीय महत्व को और मजबूत किया है।