नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भागीदारी का तिब्बती युवा कांग्रेस (TYC) ने विरोध किया है। संगठन ने चीन की सरकार पर तिब्बत की सांस्कृतिक, धार्मिक, भाषाई और राष्ट्रीय पहचान को कमजोर करने वाली नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है। साथ ही भारत और BRICS के दूसरे सदस्य देशों से चीनी नेतृत्व के सामने तिब्बत से जुड़े मुद्दों को उठाने की अपील की है।
भारत की मेजबानी की सराहना लेकिन शी का विरोध
TYC ने अपने बयान में BRICS सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत की सराहना की। संगठन ने भारत में रह रहे तिब्बती समुदाय को लंबे समय से मिले समर्थन और मेहमाननवाजी का भी उल्लेख किया। हालांकि संगठन ने चीनी राष्ट्रपति के सम्मेलन में शामिल होने का विरोध करते हुए बीजिंग पर पिछले कई दशकों से तिब्बती पहचान को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
TYC ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक शासन पर बातचीत के दौरान मानवाधिकारों से जुड़ी चिंताओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। संगठन चाहता है कि BRICS के मंच पर तिब्बत के मुद्दे पर भी चर्चा हो।
दिल्ली में प्रदर्शन भी किया
शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले TYC से जुड़े सदस्यों ने दिल्ली में प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने चीन की तिब्बत संबंधी नीतियों के खिलाफ नारे लगाए और हाल में लागू किए गए ‘Ethnic Unity and Progress Law’ का विरोध किया। TYC का आरोप है कि इस कानून से तिब्बती संस्कृति और पहचान पर दबाव और बढ़ सकता है।
संगठन ने तिब्बती बौद्ध धर्म के मामलों में चीनी सरकार की भूमिका पर भी आपत्ति जताई है। खास तौर पर दलाई लामा के उत्तराधिकारी की पहचान से जुड़े मुद्दे को TYC ने धार्मिक मामला बताते हुए इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध किया।
सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचे। यह करीब सात साल बाद उनकी पहली भारत यात्रा है। वह 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने 10 सितंबर को आधिकारिक रूप से उनकी यात्रा की घोषणा की थी।
भारत और चीन के रिश्तों में 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद गंभीर तनाव पैदा हुआ था। अक्टूबर 2024 में सीमा पर डिसएंगेजमेंट को लेकर समझौता होने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। इसके बावजूद सीमा और दूसरे कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
BRICS देशों से की अपील
TYC ने भारत सहित BRICS के सदस्य देशों से अपील की है कि वे चीनी नेतृत्व के साथ बातचीत के दौरान तिब्बत से संबंधित मानवाधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों को भी सामने रखें। संगठन का कहना है कि स्थायी क्षेत्रीय शांति और सहयोग के लिए इन चिंताओं पर बातचीत जरूरी है।
वहीं चीन तिब्बत से संबंधित इस तरह के आरोपों को लंबे समय से खारिज करता रहा है और अपनी नीतियों को विकास, स्थिरता तथा जातीय एकता से जोड़कर पेश करता है। BRICS सम्मेलन के बीच TYC के विरोध ने एक बार फिर तिब्बत के मुद्दे को भारत-चीन संबंधों से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में ला दिया है।
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