मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में आंध्र प्रदेश कैबिनेट, एक विशेष आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों (BC) के लिए आरक्षण पर विचार कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि BC आरक्षण मौजूदा आबादी के आंकड़ों और स्थानीय हालात पर आधारित होना चाहिए। कोर्ट के आदेशों के अनुसार, ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में ऐसा आरक्षण देने से पहले "ट्रिपल टेस्ट" पूरा करना ज़रूरी है। अगर यह टेस्ट पूरा नहीं होता है, तो सीटों को सामान्य श्रेणी का माना जाएगा, सिवाय उन सीटों के जो अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षित हैं।

राज्य सरकार ने रिटायर्ड IAS अधिकारी राजीव रंजन मिश्रा की अध्यक्षता में एक विशेष आयोग बनाया था। आयोग ने 23 मार्च को काम शुरू किया, ज़िलों का दौरा किया और BC जाति संगठनों से राय ली। लगभग सात महीने के अध्ययन के बाद, आयोग ने 14 अगस्त 2026 को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

आयोग ने कहा कि उसकी रिपोर्ट मौजूदा आंकड़ों पर आधारित है। इन आंकड़ों को "स्वर्ण ग्रामम" और "स्वर्ण वार्ड" के ज़रिए लोगों के साथ साझा किया गया था ताकि वे किसी भी गड़बड़ी की पहचान कर सकें और उसे ठीक करवा सकें। पंचायत राज और ग्रामीण विकास विभाग तथा नगर प्रशासन और शहरी विकास विभाग द्वारा सत्यापन के बाद, आंध्र प्रदेश की कुल आबादी का अनुमान 5,27,46,589 लगाया गया।

इस कुल आबादी में से 2,65,94,418 लोगों—यानी 50.42 प्रतिशत—की पहचान BC के तौर पर की गई। आयोग के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में BC की हिस्सेदारी 48.84 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 54.36 प्रतिशत है।

उम्मीद है कि कैबिनेट इन नतीजों के आधार पर स्थानीय निकाय चुनावों में BC आरक्षण पर फ़ैसला लेगी।

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