विशाखापत्तनम: फाइज़र हेल्थकेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने अपने 'फाइज़र ऑटोनॉमस टीम्स' (PATs) प्रोग्राम के पांचवें बैच में 50 से ज़्यादा छात्राओं को शामिल करके ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण पर अपना ध्यान बढ़ाया है।

GITAM डीम्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर, कंपनी खास तौर पर तैयार किए गए तीन साल के B.Sc. केमिस्ट्री डिग्री प्रोग्राम में ट्रेनिंग देगी।

इस ग्रुप को चुनने के लिए, कंपनी ने उत्तरी आंध्र के ज़िलों में एक बड़ी स्क्रीनिंग प्रक्रिया चलाई, जिसमें 15 ग्रामीण गांवों में रहने वाली इंटरमीडिएट तक पढ़ी-लिखी लगभग 500 महिला उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया।

इस पहल का मकसद फार्मास्युटिकल वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और साथ ही स्थानीय टैलेंट को भविष्य के साइट लीडर के तौर पर तैयार करना है। मौजूदा बैच की औसत उम्र 19 साल है और इसमें शामिल 77 प्रतिशत छात्राएं स्थानीय इलाके से हैं।

इस पार्टनरशिप के ज़रिए पिछले चार सालों में, PAT प्रोग्राम के माध्यम से लगभग 350 महिलाएं फाइज़र की वर्कफोर्स में शामिल हुई हैं।

संस्थान के रजिस्ट्रार डी. गुनासेखरन ने कहा कि हायर एजुकेशन में महिलाओं का बढ़ता एनरोलमेंट और इंडस्ट्रियल प्लेटफॉर्म मिलकर ग्रामीण सशक्तिकरण और आर्थिक विकास के लिए असल मौके पैदा करते हैं। फाइज़र विजाग PGS साइट लीड कट्टा रवि चंदर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह प्रोग्राम सीखने का एक अनोखा मॉडल देता है, जिसमें छात्राएं अपनी डिग्री पूरी करने के साथ-साथ तीन साल का व्यापक मैन्युफैक्चरिंग अनुभव भी हासिल करती हैं।

प्रोग्राम के स्ट्रक्चरल फ्रेमवर्क पर बात करते हुए, फाइज़र ग्लोबल सप्लाई इंडिया में डायरेक्टर-पीपल एक्सपीरियंस, रवि किरण टीगाला ने बताया कि यह पहल एक साइंटिफिक तरीके पर आधारित है। इसमें डायग्नोस्टिक स्टडीज़, चार चरणों वाली सिलेक्शन प्रक्रिया, स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग और आधुनिक वर्कप्लेस की ज़रूरतों के हिसाब से ढलने के लिए होलिस्टिक स्किल डेवलपमेंट शामिल है।

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