ओंगोल: पूर्व विधायक अमांची कृष्ण मोहन ने प्रकाशम जिले के संयुक्त कलेक्टर और ओंगोल शहरी विकास प्राधिकरण (ओयूडीए) की उपाध्यक्ष कल्पना कुमारी को एक औपचारिक शिकायत सौंपी है, जिसमें वेतापलेम मंडल में फैले अनधिकृत भूमि लेआउट के बारे में गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।

अपने अभ्यावेदन में पूर्व विधायक ने कहा कि कोठापेटा, अक्कयापलेम, ईपुरुपालेम और नयुनिपल्ली राजस्व गांवों में कृषि भूमि को उचित मंजूरी के बिना आवासीय भूखंडों में परिवर्तित किया जा रहा है। ऐसे अनधिकृत लेआउट की कुल सीमा लगभग 398.04 एकड़ है। उन्होंने यह भी बताया है कि कोठापेटा गांव के सर्वेक्षण संख्या 408/1बी में 22 एकड़ भूमि तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) के अंतर्गत आती है। सीआरजेड क्षेत्रों में विकास के लिए विशेष सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होती है। कथित तौर पर इन जमीनों को बिना किसी अनुमति के हाउस प्लॉट के रूप में बेचा जा रहा है।

शिकायत को अतिक्रमण प्रमाणपत्रों द्वारा समर्थित किया गया है जो दर्शाता है कि पंजीकृत भूमि लेनदेन कृषि भूमि को घर की साइटों या भूखंडों के रूप में वर्णित करते हैं। शिकायत के साथ जमा की गई भौतिक तस्वीरें दिखाती हैं कि इन जमीनों पर सड़कें बनाई जा रही हैं और भूखंड विकसित किए जा रहे हैं।

कृष्ण मोहन ने आंध्र प्रदेश भूमि विकास (लेआउट और सब-डिवीजन) नियम 2017 और एपी कृषि भूमि (गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए रूपांतरण) अधिनियम 2006 का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी निजी व्यक्ति उचित लेआउट अनुमोदन के बिना कृषि भूमि को भवन भूखंड के रूप में नहीं बेच सकता है। उन्होंने यह भी नोट किया है कि सरकार के LRS-2025 संशोधन का उपयोग अनधिकृत लेआउट गतिविधि को जारी रखने के लिए एक कारण के रूप में नहीं किया जा सकता है।

पूर्व विधायक ने ओयूडीए के उपाध्यक्ष से सभी प्रभावित भूमि का संयुक्त सर्वेक्षण करने का अनुरोध किया है और अधिकारियों से आगे के लेनदेन को रोकने और डेवलपर्स को नोटिस जारी करने के लिए कहा है।

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