काकीनाडा। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले गोदावरी पुष्करलु को ऐतिहासिक और भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। जिला प्रशासन इस 12 दिवसीय धार्मिक आयोजन के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रहा है। अनुमान है कि आयोजन के दौरान प्रतिदिन लगभग 80 लाख तीर्थयात्री पहुंच सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन परिवहन, स्वच्छता, सुरक्षा, आवास और स्नान घाटों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

पूर्वी गोदावरी जिले की कलेक्टर कीर्ति चेकुरी ने बताया कि गोदावरी पुष्करलु-2027 के आयोजन को लेकर विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुविधाजनक और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके लिए 22 प्रमुख विभागों के सहयोग से विस्तृत कार्ययोजना बनाई जा रही है।

शुक्रवार को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कलेक्टर कीर्ति चेकुरी और राजमहेंद्रवरम के नगर आयुक्त राहुल मीना ने पुष्करलु के विशेष अधिकारी तथा नगर प्रशासन एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव को तैयारियों की जानकारी दी। बैठक में आयोजन से संबंधित विभिन्न योजनाओं, प्रस्तावित निर्माण कार्यों और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं पर चर्चा की गई।

प्रशासन के अनुमान के अनुसार, प्रतिदिन आने वाले लगभग 80 लाख श्रद्धालुओं में से 60 लाख शहरी क्षेत्रों और 20 लाख ग्रामीण क्षेत्रों की ओर जा सकते हैं। इसी अनुमान के आधार पर शहर और ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग व्यवस्थाएं विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

गोदावरी पुष्करलु को यादगार बनाने के लिए प्रशासन कई ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, जिनके माध्यम से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जाएगा। इनमें अखंड नदी आरती, 20 हजार से 30 हजार कलाकारों की भागीदारी वाला विशाल कुचिपुड़ी नृत्य प्रदर्शन और विश्व स्तरीय स्वच्छता अभियान शामिल हैं।

आयोजन के दौरान स्वच्छता व्यवस्था को लेकर विशेष योजना तैयार की गई है। प्रशासन लगभग 20 हजार शौचालय और मूत्रालय बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा प्रतिदिन तीन शिफ्टों में करीब आठ हजार स्वच्छता कर्मचारियों को तैनात करने की योजना है, ताकि तीर्थयात्रियों को साफ-सुथरा वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से प्रतिदिन लगभग 2,800 टन ठोस कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। प्रशासन ने इसके संग्रहण, परिवहन और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण के लिए विशेष इंतजाम करने की योजना बनाई है। अधिकारियों का ध्यान इस बात पर भी है कि आयोजन के दौरान घाटों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनी रहे।

तीर्थयात्रियों की आवाजाही को सुचारु बनाने के लिए व्यापक परिवहन योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-16, एनएच-51ई और ग्रीनफील्ड हाईवे को टोल गेटों, अस्थायी पुष्कर नगरों और शटल बस मार्गों से जोड़ने की योजना है।

इसके अलावा स्नान घाटों तक पहुंचने और वहां से बाहर निकलने के लिए अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य भीड़ को व्यवस्थित करना और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना है। प्रशासन घाटों के आसपास बैरिकेडिंग और दिशा-सूचक व्यवस्थाओं पर भी काम कर रहा है।

श्रद्धालुओं और अतिथियों के ठहरने के लिए भी विशेष इंतजाम प्रस्तावित हैं। इनमें जर्मन शैली के बड़े हैंगर, टेंट सिटी, वीआईपी और वीवीआईपी अतिथियों के लिए विशेष टेंट तथा अन्य अस्थायी आवास सुविधाएं शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से आयोजन के दौरान आने वाले लोगों को ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्नान करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी प्रशासन ने बड़ी योजना बनाई है। कलेक्टर कीर्ति चेकुरी के अनुसार, जिले में कुल 5,100 मीटर लंबे अस्थायी स्नान घाट विकसित किए जाएंगे। इन घाटों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक स्नान व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

आयोजन की तैयारियों में आधुनिक तकनीक का भी उपयोग करने की योजना है। प्रशासन डिजिटल ट्विन तकनीक की सहायता से व्यवस्थाओं की निगरानी और योजना निर्माण पर काम कर रहा है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश स्टेट फाइबरनेट लिमिटेड (एपीएसएफएल) के माध्यम से डिजिटल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

डिजिटल सुविधाओं के साथ बैरिकेडिंग, स्वच्छता, शौचालय, परिवहन और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है। अधिकारियों का प्रयास है कि सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे और आयोजन से पहले आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं।

गोदावरी पुष्करलु-2027 के लिए तैयार की जा रही यह व्यापक योजना श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाखों तीर्थयात्रियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराना और आयोजन के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना होगी।

फिलहाल जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के साथ मिलकर प्रस्तावित योजनाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है। आने वाले समय में निर्माण कार्यों, परिवहन व्यवस्था, स्वच्छता सुविधाओं और अस्थायी स्नान घाटों को विकसित करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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