Lifestyle लाइफ स्टाइल :आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर No-Poo ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस ट्रेंड में लोग अपने बालों को धोने के लिए शैंपू का इस्तेमाल छोड़कर सिर्फ पानी का उपयोग कर रहे हैं। इस ट्रेंड को अपनाने वाले लोगों का मानना है कि केमिकल वाले शैंपू बालों की प्राकृतिक नमी और तेल को कम कर देते हैं, जबकि सिर्फ पानी से बाल धोने पर बाल ज्यादा घने, चमकदार और हेल्दी बने रहते हैं।
इस ट्रेंड को खासकर उन लोगों द्वारा अपनाया जा रहा है जो प्राकृतिक और केमिकल-फ्री लाइफस्टाइल की ओर बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि शैंपू में मौजूद सल्फेट और अन्य केमिकल्स बालों की जड़ों को कमजोर कर सकते हैं, जिससे बालों का झड़ना और ड्रायनेस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
No-Poo ट्रेंड में लोग बालों को सिर्फ पानी से धोते हैं और कभी-कभी स्कैल्प की सफाई के लिए हल्की मसाज का सहारा लेते हैं। कई लोग दावा करते हैं कि कुछ समय बाद बालों की नेचुरल शाइन और टेक्सचर बेहतर हो जाता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स की राय इस ट्रेंड को लेकर थोड़ी अलग है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ पानी से बाल धोना हर व्यक्ति के लिए सही नहीं हो सकता। अगर स्कैल्प ज्यादा ऑयली है या पसीना और धूल ज्यादा जमा होती है, तो पानी से पूरी तरह सफाई नहीं हो पाती। ऐसे में डैंड्रफ और खुजली जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
डर्मेटोलॉजिस्ट्स के अनुसार, शैंपू का सही चुनाव करना ज्यादा जरूरी है, न कि उसे पूरी तरह छोड़ देना। माइल्ड और सल्फेट-फ्री शैंपू का इस्तेमाल बालों की सेहत के लिए बेहतर माना जाता है। साथ ही, बालों को हफ्ते में 2 से 3 बार धोना भी जरूरी बताया जाता है, ताकि स्कैल्प साफ और स्वस्थ रहे।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि No-Poo ट्रेंड का असर हर व्यक्ति के बालों के टाइप पर अलग हो सकता है। कुछ लोगों को इससे फायदा मिल सकता है, लेकिन कई लोगों को बालों में चिपचिपापन और बदबू जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है और युवा इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि किसी भी ट्रेंड को अपनाने से पहले अपनी स्किन और बालों की जरूरत को समझना जरूरी है।