लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: इन दिनों यदि आप किसी ट्रेंडी कैफे या रेस्टोरेंट में जाते हैं, तो आपको लगभग हर दूसरे टेबल पर रंग-बिरंगे लिक्विड और नीचे काले मोतियों जैसे दानों से भरा एक बड़ा सा ग्लास जरूर नजर आएगा। जी हां, हम बात कर रहे हैं 'बोबा टी' (Boba Tea) की, जिसे 'बबल टी' (Bubble Tea) के नाम से भी जाना जाता है। आजकल युवाओं और बच्चों के बीच यह ड्रिंक एक बड़े स्टेटस सिंबल और सोशल मीडिया ट्रेंड के रूप में उभरकर सामने आई है। हर कोई इसके अनोखे स्वाद और लुक का दीवाना हो रहा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि शौक-शौक में इसे गटकने वाले अधिकांश लोग इसके सेहत पर पड़ने वाले असर से पूरी तरह अनजान हैं।
चमकीले स्ट्रॉ और च्युइंग गम जैसे चबाने वाले दानों (बबल्स) के पीछे छिपे फायदों और गंभीर नुकसानों के बारे में मुश्किल से ही कोई जानता है। आइए इस आर्टिकल में विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या है यह बोबा टी और क्यों इसका अत्यधिक शौक आपके होश उड़ा सकता है।
ताइवान से शुरू हुआ 80 के दशक का यह सफर
वर्ल्ड फेमस हो चुकी बोबा टी का इतिहास बहुत पुराना है। यह मुख्य रूप से ताइवान की एक पारंपरिक और खास ड्रिंक है, जिसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। धीरे-धीरे इसने पूरी दुनिया के मार्केट पर कब्जा कर लिया और आज इसके सैकड़ों फ्लेवर्स जैसे- मैंगो, मैचा, चॉकलेट, और बेरीज बाजार में उपलब्ध हैं।
इसे पारंपरिक रूप से बनाने के लिए चाय के बेस (ब्लैक या ग्रीन टी) में दूध, तरह-तरह के फ्लेवर्ड सिरप और बर्फ मिलाई जाती है। लेकिन इसकी असली यूएसपी (USP) इसके नीचे बैठने वाले गोल-गोल दाने होते हैं, जिन्हें 'टैपिओका पर्ल्स' (Tapioca Pearls) कहा जाता है। ये पर्ल्स कसावा नाम की एक पहाड़ी सब्जी की जड़ से निकलने वाले स्टार्च (साबूदाने का एक रूप) से तैयार किए जाते हैं, जिन्हें चीनी के गाढ़े शीरे (शुगर सिरप) में उबाला जाता है ताकि वे मीठे और चबानेदार हो सकें।
पोषक तत्वों के नाम पर केवल 'शून्य'
अगर आप यह सोचकर बोबा टी पी रहे हैं कि इसमें 'टी' यानी चाय शब्द जुड़ा है तो यह सेहतमंद होगी, तो आप बहुत बड़े भ्रम में हैं। न्यूट्रिशन वैल्यू (पोषक तत्वों) के मामले में बोबा टी बेहद गरीब ड्रिंक है।
सीमित मिनरल्स: इसमें शरीर के लिए जरूरी विटामिंस और मिनरल्स नाममात्र के होते हैं। फोलेट, कैल्शियम और आयरन जैसे आवश्यक तत्व इसमें बहुत ही सीमित और नगण्य मात्रा में पाए जाते हैं।
अत्यधिक कैलोरी: इसके विपरीत, इसमें रिफाइंड शुगर, कार्बोहाइड्रेट और भारी मात्रा में कैलोरी कूट-कूट कर भरी होती है। एक सामान्य ग्लास बोबा टी में लगभग 300 से 500 कैलोरी तक हो सकती है, जो एक वक्त के पूरे भोजन के बराबर है।
सेहत को फायदे या सिर्फ मीठा धोखा?
जब बात इसके फायदों की आती है, तो पारंपरिक रूप से ग्रीन टी या ब्लैक टी बेस से बनी बोबा टी में थोड़े-बहुत एंटीऑक्सीडेंट्स मिल सकते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं। इसके अलावा, चूंकि इसमें भारी मात्रा में चीनी और कार्बोहाइड्रेट होते हैं, इसलिए यह आपको तुरंत एनर्जी (Energy Boost) दे सकती है। लेकिन यह एनर्जी बहुत अस्थायी होती है और इसे पीने के कुछ ही समय बाद शरीर में शुगर लेवल तेजी से गिरता है, जिससे थकान महसूस होने लगती है।
सावधान! बोबा टी के ये साइड इफेक्ट्स उड़ा देंगे होश
1. तेजी से बढ़ता वजन और मोटापा:
चूंकि बोबा टी में इस्तेमाल होने वाले सिरप और टैपिओका पर्ल्स दोनों को चीनी में डुबाकर रखा जाता है, इसलिए इसका रोजाना या अत्यधिक सेवन शरीर में एक्स्ट्रा फैट जमा करता है। यह वजन बढ़ाने और मोटापे का सबसे शॉर्टकट रास्ता है।
2. टाइप-2 डायबिटीज का खतरा:
एक कप बबल टी में आपकी दैनिक आवश्यकता से कई गुना ज्यादा चीनी होती है। यह लिक्विड शुगर सीधे आपके ब्लड स्ट्रीम में जाती है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है और व्यक्ति बहुत जल्दी टाइप-2 डायबिटीज की चपेट में आ सकता है।
3. पेट की खराबी और कब्ज:
टैपिओका पर्ल्स यानी साबूदाने जैसे ये बबल्स पूरी तरह से स्टार्च होते हैं और प्रकृति में काफी चिपचिपे होते हैं। कई बार हमारा पाचन तंत्र इन्हें ठीक से पचा नहीं पाता, जिससे गंभीर कब्ज, पेट फूलना (Bloating), गैस और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
4. दांतों में सड़न और कैविटी:
इस ड्रिंक की मिठास और चिपचिपे बबल्स जब दांतों के बीच फंसते हैं, तो बैक्टीरिया को पनपने का पूरा मौका मिलता है। इससे दांतों में सड़न और कैविटी की समस्या बहुत आम हो जाती है।
यदि आप भी बोबा टी के शौकीन हैं, तो इसे कभी-कभार के आनंद (Cheat Drink) तक ही सीमित रखें। इसे अपनी डेली लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाना आपकी सेहत की बर्बादी को खुद दावत देने जैसा है।