लाइफ स्टाइल : कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री **सचिन पायलट** अपनी राजनीति के साथ फिट और यंग लुक के लिए भी चर्चा में रहते हैं। 48 साल की उम्र में भी उनकी फिटनेस देखकर कई लोगों के मन में सवाल आता है कि व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रमों, लगातार यात्राओं और अनियमित खाने के बावजूद वह खुद को फिट कैसे रखते हैं? खास बात यह है कि पायलट बेहद सख्त डाइट का दावा नहीं करते। उन्होंने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि चुनावी और राजनीतिक दौरों के दौरान समर्थकों के प्यार से मिलने वाली **जलेबी, पकौड़े, दही भल्ले और रसगुल्ले** भी वह खा लेते हैं।
सितंबर 2025 में सचिन पायलट 48 साल के हुए थे और दिसंबर में उन्होंने खुद भी एक कार्यक्रम में मजाकिया अंदाज में कहा था कि अब वह 48 साल के हैं और खुद को पूरी तरह युवा वर्ग में नहीं मानते। इसके बावजूद उनका एक्टिव लाइफस्टाइल उन्हें फिट रखने में बड़ी भूमिका निभाता दिखाई देता है।
सुबह स्प्राउट्स से करते रहे हैं शुरुआत
सचिन पायलट ने अपने खानपान के बारे में बताया था कि वह सुबह **स्प्राउट्स यानी अंकुरित अनाज** खाने की कोशिश करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि उन्हें स्प्राउट्स खास पसंद नहीं हैं, लेकिन फिटनेस को ध्यान में रखते हुए वह इन्हें अपनी डाइट में शामिल करते रहे हैं।
अंकुरित अनाज में प्रोटीन, फाइबर और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट मिलते हैं। इन्हें संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत अलग होती है।
14 से 15 घंटे तक फील्ड में सक्रिय
राजनीतिक जीवन में पायलट का शेड्यूल काफी व्यस्त रहा है। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि कई बार वह दिन में **14 से 15 घंटे तक फील्ड में रहते हैं**। ऐसे शेड्यूल में हर दिन तय समय पर हेल्दी खाना खाना मुश्किल हो जाता है।
रैलियां, जनसभाएं, कार्यकर्ताओं से मुलाकात और लगातार यात्राओं के कारण दिनभर शारीरिक गतिविधि बनी रहती है। ऐसे में फिटनेस केवल जिम में बिताए समय तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे दिन सक्रिय रहना भी महत्वपूर्ण होता है।
जलेबी और पकौड़ों को नहीं कहते हमेशा 'ना'
फिटनेस का मतलब यह नहीं कि सचिन पायलट मिठाई या तली हुई चीजों को पूरी तरह छोड़ चुके हैं। उन्होंने बताया था कि राजनीतिक दौरों के दौरान समर्थक प्यार से **जलेबी, पकौड़े, दही भल्ले और रसगुल्ले** जैसी चीजें खिलाते हैं। ऐसे मौकों पर वह कई बार इन्हें खाने से इनकार नहीं कर पाते।
उन्होंने यह भी माना था कि कई बार लंबे कार्यक्रमों के कारण इतनी भूख लग जाती है कि तली हुई चीजों या मिठाई से खुद को रोकना मुश्किल होता है।
यानी उनकी फिटनेस का मंत्र हर पसंदीदा चीज को हमेशा के लिए छोड़ना नहीं, बल्कि व्यस्त जीवन के बीच संतुलन बनाने से जुड़ा दिखाई देता है।
खेल से रहा है पुराना रिश्ता
सचिन पायलट की फिटनेस में खेलों की भूमिका भी रही है। पुराने प्रोफाइल में उनकी खेलों में रुचि का जिक्र मिलता है। राजनीतिक जीवन में लगातार दौरे और सार्वजनिक कार्यक्रम भी उन्हें शारीरिक रूप से सक्रिय रखते हैं।
फिटनेस विशेषज्ञ भी आम तौर पर स्वस्थ वयस्कों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ स्ट्रेंथ एक्सरसाइज की सलाह देते हैं। हर दिन जिम जाना ही फिट रहने का एकमात्र तरीका नहीं है। तेज चलना, खेलना, सीढ़ियां चढ़ना और रोजमर्रा की गतिविधियों में सक्रिय रहना भी फिटनेस में योगदान देता है।
फिटनेस में 'बैलेंस' है सबसे अहम
पायलट की पुरानी टिप्पणियों से एक दिलचस्प बात सामने आती है कि वह फिट रहने के लिए अपने खाने को लेकर अव्यावहारिक प्रतिबंध नहीं लगाते। उनके राजनीतिक जीवन में भोजन हमेशा उनके नियंत्रण में नहीं रहता। इसके बावजूद सुबह पौष्टिक चीज शामिल करना और पूरे दिन सक्रिय रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा है।
इससे एक सामान्य फिटनेस सीख जरूर ली जा सकती है कि कभी-कभार जलेबी या पसंदीदा मिठाई खाने से अकेले फिटनेस तय नहीं होती। लंबे समय में कुल आहार, भोजन की मात्रा, नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि ज्यादा मायने रखती है।
हालांकि सचिन पायलट की पुरानी दिनचर्या को किसी का व्यक्तिगत डाइट या फिटनेस प्लान नहीं माना जाना चाहिए। उम्र, वजन, स्वास्थ्य और गतिविधि के स्तर के अनुसार हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है।
48 साल की उम्र में भी सचिन पायलट का एक्टिव अंदाज बताता है कि व्यस्त जिंदगी में फिट रहने के लिए केवल सख्त डाइट ही जरूरी नहीं है। नियमित सक्रियता और खानपान में संतुलन ज्यादा टिकाऊ तरीका हो सकता है। और हां, कभी-कभार जलेबी का स्वाद भी लिया जा सकता है।
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