लाइफ स्टाइल : भारतीय रसोई में घी का इस्तेमाल दाल रोटी सब्जी मिठाई और पूजा-पाठ तक में किया जाता है। बाजार में अलग-अलग कंपनियों का घी उपलब्ध है लेकिन कई लोग उसकी शुद्धता को लेकर आशंकित रहते हैं। ऐसे में घर पर दूध की मलाई से तैयार किया गया घी बेहतर विकल्प माना जाता है। इसकी खुशबू और स्वाद भी बाजार में मिलने वाले सामान्य घी से अलग होता है। हालांकि पारंपरिक तरीके से घी बनाने में काफी समय और मेहनत लगती है।
आमतौर पर महिलाएं कुछ दिनों तक दूध से निकली मलाई को फ्रिज या फ्रीजर में इकट्ठा करती हैं। पर्याप्त मलाई जमा होने के बाद उसे मथकर मक्खन निकाला जाता है। इसके बाद मक्खन को धीमी आंच पर पकाकर घी तैयार किया जाता है। मथने की प्रक्रिया में समय लगता है और सही तापमान नहीं होने पर पर्याप्त मक्खन भी नहीं निकल पाता। एक आसान तरीके से मलाई को बिना मथे भी घी बनाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में मलाई से अलग हुए दूध के ठोस अंश का भी उपयोग किया जा सकता है।
घी बनाने के लिए सबसे पहले कुछ दिनों से जमा की गई मलाई लें। यदि मलाई फ्रीजर में रखी गई है तो इसे बनाने से कुछ घंटे पहले बाहर निकाल दें। जमी हुई मलाई को सीधे गर्म करने से उसे पिघलने में अधिक समय लग सकता है। ध्यान रखें कि मलाई को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर न छोड़ें। उसमें दुर्गंध रंग में बदलाव या फफूंद दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
अब मलाई को मोटे तले वाली साफ कड़ाही में डालें। इसमें थोड़ी मात्रा में पानी मिलाकर धीमी से मध्यम आंच पर गर्म करें। मलाई को लगातार चलाते रहें ताकि वह कड़ाही की सतह पर चिपके या जले नहीं। कुछ देर बाद मलाई पूरी तरह पिघलकर गाढ़े दूध जैसी दिखाई देने लगेगी। इसके बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को हल्का ठंडा होने दें।
मलाई के मिश्रण के बीच में साफ स्टील का गिलास रखें और उसमें ठंडा पानी भर दें। कड़ाही को ढककर फ्रिज में रातभर रख दें। सुबह मलाई जमने के बाद गिलास सावधानी से बाहर निकालें। गिलास हटने से बीच में बनी खाली जगह में थोड़ा ठंडा पानी डालें और फिर उस पानी को किसी दूसरे बर्तन में निकाल लें। यह प्रक्रिया एक बार और दोहराई जा सकती है। इससे मलाई में मौजूद अतिरिक्त तरल अलग करने में मदद मिलेगी।
निकाले गए तरल को तुरंत फेंकने की जरूरत नहीं है। यदि उसका स्वाद और गंध सामान्य हो तो इसे आटा गूंथने या कढ़ी जैसी डिश बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे पीने से पहले इसकी ताजगी सुनिश्चित करना जरूरी है।
इसके बाद कड़ाही में बची जमी मलाई को धीमी आंच पर दोबारा गर्म करें। इसे लगातार चलाते हुए पिघलने दें। कुछ समय बाद इसमें हल्का पीलापन दिखाई देने लगेगा और दूध के ठोस अंश अलग होने लगेंगे। यदि आप इन ठोस अंशों का इस्तेमाल करना चाहती हैं तो इस चरण पर गैस बंद कर मिश्रण को साफ मलमल के कपड़े या महीन छलनी से छान लें। ध्यान रखें कि इससे मिलने वाला पदार्थ पारंपरिक दूध को फाड़कर बनने वाले पनीर से अलग हो सकता है।
छानने के बाद बची वसायुक्त सामग्री को दोबारा कड़ाही में डालकर धीमी आंच पर पकाएं। कुछ देर में साफ सुनहरा घी ऊपर दिखाई देने लगेगा और हल्की भूरी खुरचन नीचे बैठ जाएगी। खुरचन का रंग ज्यादा गहरा होने से पहले गैस बंद कर दें क्योंकि अधिक पकाने से घी जल सकता है और उसका स्वाद कड़वा हो सकता है।
घी को थोड़ा ठंडा होने के बाद साफ और सूखी छलनी से छान लें। इसे पूरी तरह सूखे एयरटाइट कांच या स्टील के डिब्बे में रखें। घी निकालने के लिए हमेशा सूखा चम्मच इस्तेमाल करें ताकि उसमें नमी न पहुंचे। नीचे बची खुरचन में पिसी हुई चीनी मिलाकर स्वादिष्ट मिठाई या छोटे पेड़े बनाए जा सकते हैं। इस तरह मलाई मथने की मेहनत किए बिना घर पर खुशबूदार घी तैयार किया जा सकता है।