बेबी फूड कितना सुरक्षित? क्वालिटी टेस्ट में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे
क्वालिटी टेस्ट में बड़ा खुलासा
LIFESTYLE : शिशुओं के लिए बाजार में उपलब्ध बेबी फूड की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ाने वाली जानकारी सामने आई है। खाद्य सुरक्षा जांच में कुछ शिशु आहार नमूने तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें पोषक तत्वों की मात्रा में गड़बड़ी से लेकर खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं। खास बात यह है कि जांच के दायरे में केवल छोटे उत्पादक ही नहीं बल्कि बड़े और चर्चित ब्रांड के उत्पाद भी आए हैं।
शिशु आहार सामान्य खाद्य पदार्थों की तुलना में अधिक संवेदनशील श्रेणी में आता है। नवजात और छोटे बच्चों का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए उनके भोजन में पोषक तत्वों की सही मात्रा और उत्पाद की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। आयरन, कैल्शियम, विटामिन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारित सीमा में होना जरूरी है। इसी वजह से बेबी फूड के निर्माण, पैकेजिंग, लेबलिंग और प्रचार के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं।
हाल में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने नेस्ले इंडिया के तीन शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े मामलों में कार्रवाई शुरू की है। इनमें NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 के प्रचार में किए गए कुछ दावों पर सवाल उठाए गए हैं। नियामक के अनुसार शिशु आहार के प्रचार से जुड़े नियमों के तहत ऐसे दावों की अनुमति सीमित है। कंपनी ने कहा है कि उसके उत्पाद लागू नियमों का पालन करते हैं और उसने नियामक को अपना स्पष्टीकरण दिया है।
एक अन्य मामले में फॉलो-अप फॉर्मूला के नमूने में बायोटिन यानी विटामिन B7 की मात्रा निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं पाए जाने की बात सामने आई। नमूने की दोबारा जांच में भी मानक संबंधी मुद्दा सामने आने के बाद नियामकीय प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। हालांकि किसी नमूने का मानक पर खरा नहीं उतरना अपने आप यह साबित नहीं करता कि संबंधित ब्रांड के सभी उत्पाद असुरक्षित हैं। प्रत्येक मामले का मूल्यांकन संबंधित बैच, जांच रिपोर्ट और नियामकीय प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।
देशभर में FSSAI और राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर बाजार से शिशु आहार और अन्य खाद्य उत्पादों के नमूने लेकर उनकी जांच करते हैं। जांच में उत्पाद की संरचना, पोषक तत्वों की मात्रा, लेबल पर दी गई जानकारी और गुणवत्ता मानकों को देखा जाता है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित कंपनी को नोटिस देने, स्पष्टीकरण मांगने या कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
विशेषज्ञ छोटे बच्चों के लिए खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेट की सील, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा आयु वर्ग से संबंधित निर्देश देखने की सलाह देते हैं। पैकेज पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही उत्पाद तैयार करना भी जरूरी है। किसी बच्चे को एलर्जी, उल्टी, दस्त या दूसरी असामान्य समस्या दिखाई दे तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
बेबी फूड से जुड़े हालिया मामलों ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि केवल ब्रांड का नाम खाद्य सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता। नियमित जांच, सख्त गुणवत्ता नियंत्रण और नियमों का पालन शिशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।