स्पेस में Workout कैसे करते हैं एस्ट्रोनॉट्स?

Update: 2025-03-16 03:58 GMT

लाइफस्टाइल | अंतरिक्ष यात्रियों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहना पड़ता है, क्योंकि अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसे हालात नहीं होते। वहां गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे फिटनेस बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। यही कारण है कि एस्ट्रोनॉट्स को हर दिन स्पेस वर्कआउट करना अनिवार्य होता है। आइए जानते हैं कि अंतरिक्ष यात्री कैसे खुद को फिट रखते हैं और उनका वर्कआउट रूटीन कैसा होता है।

अंतरिक्ष में फिटनेस क्यों जरूरी?

पृथ्वी पर हमारा शरीर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में लगातार काम करता है, जिससे हमारी मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं। लेकिन अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी (Zero Gravity) के कारण हड्डियों का घनत्व (Bone Density) घटने लगता है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

अगर अंतरिक्ष यात्री नियमित रूप से व्यायाम न करें, तो वे धरती पर लौटने के बाद गंभीर शारीरिक समस्याओं का सामना कर सकते हैं, जैसे कि मांसपेशियों का सिकुड़ना, हड्डियों की कमजोरी और संतुलन की समस्या। इसलिए NASA, ESA और अन्य स्पेस एजेंसियां एस्ट्रोनॉट्स के लिए कड़े फिटनेस नियम लागू करती हैं।

स्पेस में वर्कआउट कैसे करते हैं एस्ट्रोनॉट्स?

अंतरिक्ष में एक्सरसाइज करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए उपकरणों का उपयोग किया जाता है, क्योंकि वहां वजन उठाने वाले पारंपरिक जिम उपकरण काम नहीं करते। अंतरिक्ष यात्री हर दिन लगभग 2 घंटे व्यायाम करते हैं।

1. ट्रेडमिल (Treadmill) पर दौड़ना

  • अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में ट्रेडमिल को स्पेशल हार्नेस (Harness) और बंजी कॉर्ड्स (Bungee Cords) की मदद से इस्तेमाल किया जाता है।
  • यह कार्डियो वर्कआउट करने में मदद करता है और एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियों और दिल की सेहत को बनाए रखता है।
  • ट्रेडमिल पर 30-40 मिनट की रनिंग करना जरूरी होता है।

2. रेजिस्टेंस एक्सरसाइज (Strength Training)

  • अंतरिक्ष में वजन नहीं होता, इसलिए वेट लिफ्टिंग संभव नहीं होती।
  • इसके लिए ARED (Advanced Resistive Exercise Device) का उपयोग किया जाता है, जिससे एस्ट्रोनॉट्स डेडलिफ्ट, स्क्वाट और बेंच प्रेस जैसे एक्सरसाइज कर सकते हैं।
  • यह मांसपेशियों की मजबूती और हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में मदद करता है।

3. स्टेशनरी साइकिल (Cycling in Space)

  • ISS में मौजूद स्टेशनरी बाइक्स बिना सीट के होती हैं, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण की गैरमौजूदगी में बैठने की जरूरत नहीं होती।
  • एस्ट्रोनॉट्स को सिर्फ पैडल चलाने होते हैं, जिससे उनकी टांगों और दिल की कार्यक्षमता मजबूत होती है।
  • आमतौर पर एस्ट्रोनॉट्स को 40-50 मिनट तक साइकलिंग करनी होती है।

4. योग और खिंचाव (Stretching & Yoga)

  • अंतरिक्ष में शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखने के लिए योग और स्ट्रेचिंग करना भी जरूरी होता है।
  • इससे शरीर को रिलैक्स मिलता है और रक्त संचार बेहतर बना रहता है।

स्पेस एजेंसियां क्यों कराती हैं एक्सरसाइज?

NASA, ESA और Roscosmos जैसी स्पेस एजेंसियां अपने अंतरिक्ष यात्रियों को मिशन से पहले और बाद में स्पेशल ट्रेनिंग देती हैं। इसका मकसद यह है कि एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में स्वस्थ रहें और धरती पर लौटने के बाद भी सामान्य जीवन जी सकें।

धरती पर लौटने के बाद क्या होता है?

  • अंतरिक्ष में महीनों बिताने के बाद एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होती है।
  • वापस आने के बाद इन्हें फिजिकल थेरेपी और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है।
  • पूरी तरह से रिकवर होने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है।

निष्कर्ष

अंतरिक्ष में रहना जितना रोमांचक लगता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी होता है। एस्ट्रोनॉट्स को न केवल अपने वैज्ञानिक प्रयोगों पर ध्यान देना होता है, बल्कि खुद को शारीरिक रूप से फिट भी रखना होता है। स्पेस में वर्कआउट रूटीन इस बात को साबित करता है कि फिटनेस सिर्फ धरती तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड में भी जरूरी है!


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