जनता से रिश्ता वेबडेस्क। Heart Attack Risk: मशहूर टीवी एक्टर और बिग बॉस के विनर रह चुके सिद्धार्थ शुक्ला का गुरुवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। हैरान करने वाली बात यह है कि सिद्धार्थ सिर्फ 40 साल के थे। ताज़ा आंकड़े भी आपको हैरत में डाल सकते हैं, क्योंकि इनके मुताबिक दिल का दौरा और कार्डीऐक अटैक से ज़्यादातर लोग जो अपनी जान गंवा रहे हैं, उनकी उम्र 50 से कम है। यह आंकड़े महामारी में और तेज़ी से बढ़े हैं।

दिल की बीमारियों को लाइफस्टाइल से जोड़ा जाता है। यानी अगर सही डाइट, रोज़ाना वर्कआउट, पर्याप्त नींद, पर्याप्त पोषण आपके दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं है, तो ज़ाहिर तौर पर आप दिल से जुड़ी, डायबिटीज़ आदि जैसी बीमारियों की चपेट में आ ही जाएंगे। हालांकि, इनके अलावा भी कुछ ऐसी आदते हैं, जो दिल के दौरे या कार्डीऐक अरेस्ट के जोखिम को बढ़ा देती हैं।
तो आइए जानें कि यह आदतें क्या हैं?
1. सारा दिन बैठे रहना
वर्क फ्रॉम होम के इस नए ज़िंदगी ने हम सभी को आलसी बना दिया है। अमेरिकन हार्ट असोसियेटेड के अनुसार, जो लोग ज़्यादा हिलते नहीं हैं और 5 या उससे ज़्यादा घंटे के लिए बैठे रहते हैं, उनमें हार्ट फेलियर का जोखिम दो गुना बढ़ जाता है।
2. ज्यादा शराब पीना
ज़्यादा शराब पीने से हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और मोटापे जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं, जो आगे चलकर दिल की बीमारी का ख़तरा पैदा करती हैं। ज़्यादा या रोज़ाना खूब शराब पी लेने से दिल कमज़ोर होता जाता है।
3. ज़्यादा नमक का सेवन
ज़्यादा सोडियम लेने से हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी हो सकती है, जो दिल की बीमारी का जोखिम बनता है। पैकेट में आने वाले सूप, मीट, फ्रोज़न डिनर्स और चिप्स का सेवन काफी कम करना चाहिए, ताकि शरीर में सोडियम कम जाए।
4. फ्लॉस न करना
शोध में पाया गया है कि जो लोग कोरोनरी हार्ट डिज़ीज़ से पीड़ित होते हैं और रोज़ाना फ्लॉस करते हैं, उनमें कार्डियोवेस्कुलर से जुड़ी समस्याएं कम दिखती हैं। मसूढ़ों की बीमारी से जुड़े बैक्टीरिया शरीर में सूजन को बढ़ाते हैं, जो हृदय रोग से जुड़ा हुआ है।
5. ऐसा सोचना कि अभी को हम जवान हैं
30 साल की उम्र वाले लोग भी दिल के दौरे का शिकार हो रहे हैं। इसलिए आलस न करें और एक्सरसाइज़ और हेल्दी डाइट को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
6. नींद पूरी न लेना
आपका दिल 24 घंटे काम करता है, लेकिन जब आप सोते हैं, तो आपका हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर आपके सपनों के हिसाब से ऊपर-नीचे होता है। ये परिवर्तन हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।


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