लाइफ स्टाइल :  अक्टूबर का महीना घर में गार्डनिंग करने वाले लोगों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है और सुबह-शाम हल्की ठंडक महसूस होने लगती है। सर्दियों की कई हरी पत्तेदार सब्जियों के लिए यह मौसम अनुकूल होता है। खासकर पालक की खेती के लिए अक्टूबर से शुरू होने वाला ठंडा मौसम अच्छा माना जाता है। अगर आप अपने घर की बालकनी, छत या छोटे से गार्डन में ताजा और हरा-भरा पालक उगाना चाहते हैं, तो इसके लिए बड़े खेत या ज्यादा जगह की जरूरत नहीं है। सही तरीके से गमले में बीज लगाकर आप घर पर ही पालक की अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।
पालक पोषक तत्वों से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जी है। इसमें आयरन, कैल्शियम, फोलेट, फाइबर और विटामिन ए, सी तथा के जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि लोग इसे अपने नियमित भोजन में शामिल करना पसंद करते हैं। घर में उगाया गया पालक ताजा होने के साथ-साथ आपकी देखरेख में तैयार होता है। अगर आप बिना रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल किए पालक उगाते हैं, तो यह घरेलू किचन गार्डनिंग का अच्छा विकल्प बन सकता है।
अक्टूबर में पालक उगाना क्यों है फायदेमंद?
पालक ठंडे मौसम में अच्छी तरह बढ़ने वाली सब्जी है। इसकी बेहतर बढ़वार के लिए सामान्यतः 15 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास का तापमान अनुकूल रहता है।अक्टूबर से फरवरी तक कई क्षेत्रों में पालक की खेती की जा सकती है। हालांकि, जिन स्थानों पर अक्टूबर में भी ज्यादा गर्मी रहती है, वहां बीज लगाने से पहले तापमान कम होने का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।पालक की खासियत है कि इसे छोटे गमले, ग्रो बैग और कंटेनर में आसानी से उगाया जा सकता है। सही देखभाल मिलने पर इसकी कोमल पत्तियां कुछ ही हफ्तों में तोड़ने योग्य हो जाती हैं।
पालक उगाने के लिए कैसा गमला चुनें?
अगर आप पहली बार पालक उगा रहे हैं, तो सबसे पहले सही गमले का चुनाव करना जरूरी है।पालक की जड़ें बहुत अधिक गहराई तक नहीं जातीं, इसलिए इसे लगभग 8 से 10 इंच गहरे गमले में उगाया जा सकता है। गमला चौड़ा होने से एक साथ कई पौधे लगाने की सुविधा मिलती है।आप मिट्टी, प्लास्टिक या सीमेंट के गमले के अलावा ग्रो बैग का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।गमले के निचले हिस्से में जल निकासी के लिए छेद होना जरूरी है। अगर पानी जमा रहेगा तो पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और पालक की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
मिट्टी तैयार करने का सही तरीका
पालक की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का उपजाऊ और भुरभुरा होना बेहद जरूरी है।आप सामान्य बगीचे की मिट्टी में अच्छी तरह तैयार वर्मी कम्पोस्ट और कोकोपीट मिलाकर मिश्रण तैयार कर सकते हैं।मिट्टी तैयार करने के लिए लगभग 50 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 प्रतिशत कम्पोस्ट और 20 प्रतिशत कोकोपीट का मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है।इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और पानी का निकास भी बेहतर होता है।ध्यान रखें कि अधपकी गोबर खाद का इस्तेमाल न करें। इससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
बीज लगाने का सही तरीका
पालक उगाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज खरीदें। सबसे पहले गमले में तैयार मिट्टी भरें और उसे हल्का नम कर लें।इसके बाद मिट्टी में करीब आधा से एक सेंटीमीटर गहराई पर बीज बोएं। बीजों के बीच थोड़ी दूरी रखें, ताकि पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।बीज लगाने के बाद ऊपर से मिट्टी की पतली परत डाल दें और हल्के हाथों से पानी का छिड़काव करें।अनुकूल तापमान और नमी मिलने पर आमतौर पर 5 से 10 दिनों में बीज अंकुरित होने लगते हैं। पौधे बड़े होने पर उनके बीच लगभग 5 से 10 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखना उपयोगी है।
कितनी धूप और पानी है जरूरी?
पालक के पौधों को अच्छी बढ़वार के लिए रोजाना लगभग 4 से 6 घंटे की धूप मिलना फायदेमंद होता है।गमले को ऐसी जगह रखें, जहां सुबह की धूप आती हो। अधिक गर्मी वाले क्षेत्रों में दोपहर की तेज धूप से बचाना बेहतर रहेगा।पानी देते समय इस बात का ध्यान रखें कि मिट्टी हल्की नम रहे, लेकिन उसमें पानी जमा न हो। रोजाना पानी देना हमेशा जरूरी नहीं है। मिट्टी की ऊपरी परत सूखने लगे तो आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।
ऑर्गेनिक खाद से बढ़ेगी हरियाली
अगर आप पालक की पत्तियों को हरा-भरा और स्वस्थ बनाना चाहते हैं, तो पौधों को पर्याप्त पोषण देना जरूरी है।इसके लिए अच्छी तरह तैयार वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। पौधों की बढ़वार धीमी होने या पत्तियां हल्की पीली दिखाई देने पर खाद और पानी की स्थिति की जांच करें।ध्यान रखें कि अधिक खाद डालने से भी पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। संतुलित मात्रा में पोषण देना बेहतर है।
कितने दिनों में मिलेगा ताजा पालक?
पालक की कई किस्मों में बुवाई के लगभग 28 से 55 दिनों के भीतर कटाई की जा सकती है। छोटे और कोमल पत्तों की कटाई कुछ पहले भी संभव है।कटाई करते समय पौधे की बाहरी बड़ी पत्तियां तोड़ें और बीच का बढ़ने वाला हिस्सा सुरक्षित रखें। इससे पौधा दोबारा नई पत्तियां निकाल सकता है।लगातार पालक पाने के लिए हर दो से तीन सप्ताह के अंतराल पर नए बीज भी लगा सकते हैं।
इन गलतियों से बचना है जरूरी
कई लोग गमले में बहुत ज्यादा बीज डाल देते हैं, जिससे पौधों को पर्याप्त पोषण और जगह नहीं मिलती। इसके अलावा ज्यादा पानी, खराब जल निकासी और तेज गर्मी भी पालक की बढ़वार प्रभावित कर सकती है।पत्तियों पर कीड़े या फफूंद दिखाई देने पर प्रभावित हिस्सों को हटाएं और पौधों के बीच हवा आने-जाने की व्यवस्था रखें।
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