नई दिल्ली। आज की बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और कम शारीरिक गतिविधि के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां यह समस्या ज्यादा उम्र के लोगों में देखी जाती थी, वहीं अब युवाओं में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं। कई बार फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, इसलिए लोगों को इसकी जानकारी देर से मिलती है।
डॉक्टरों के अनुसार, शरीर में कुछ बदलावों को ध्यान से देखकर लिवर की सेहत को लेकर शुरुआती संकेत समझे जा सकते हैं। हालांकि घर पर किसी भी तरीके से फैटी लिवर की पक्की जांच नहीं की जा सकती। इसकी पुष्टि के लिए डॉक्टर की सलाह और अल्ट्रासाउंड जैसे मेडिकल टेस्ट की जरूरत पड़ती है।
क्या होता है फैटी लिवर?
फैटी लिवर एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है।
थोड़ी मात्रा में फैट सामान्य हो सकता है, लेकिन जब यह बढ़ जाता है तो लिवर के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
फैटी लिवर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—
* एल्कोहलिक फैटी लिवर
* नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर
आजकल नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं, जिसका संबंध मोटापा, डायबिटीज, खराब खानपान और कम व्यायाम से जुड़ा होता है।
1 मिनट में कैसे समझें शरीर दे रहा है संकेत?
डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में आने वाले कुछ बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हालांकि यह फैटी लिवर की पक्की जांच नहीं है, लेकिन ये संकेत आपको सावधान कर सकते हैं।
पेट के आसपास बढ़ती चर्बी
अगर आपका वजन बढ़ रहा है और खासकर पेट के आसपास फैट जमा हो रहा है तो यह लिवर की सेहत के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
पेट की अतिरिक्त चर्बी शरीर में फैट मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती है।
लगातार थकान महसूस होना
कई लोगों को फैटी लिवर की स्थिति में बिना ज्यादा काम किए भी थकान महसूस हो सकती है।
अगर लगातार कमजोरी, सुस्ती या ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन
लिवर शरीर के दाहिने ऊपरी हिस्से में होता है।
कुछ लोगों को फैटी लिवर की स्थिति में उस हिस्से में भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है।
हालांकि हर बार इसका कारण फैटी लिवर ही हो, यह जरूरी नहीं है।
डॉक्टर ने बताया आसान तरीका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फैटी लिवर के जोखिम को समझने के लिए सबसे आसान तरीका है अपनी जीवनशैली और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना।
कुछ सवाल खुद से पूछें—
* क्या आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है?
* क्या पेट की चर्बी ज्यादा है?
* क्या आप रोजाना व्यायाम नहीं करते?
* क्या आपको शुगर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है?
* क्या आपका खानपान ज्यादा तला-भुना है?
अगर इनमें से कई सवालों का जवाब हां है तो लिवर की जांच करवाना फायदेमंद हो सकता है।
फैटी लिवर के प्रमुख कारण
फैटी लिवर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
खराब खानपान
ज्यादा तला हुआ खाना, फास्ट फूड, मीठे पेय पदार्थ और अधिक कैलोरी वाला भोजन लिवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ा सकते हैं।
व्यायाम की कमी
शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है, जिसका असर लिवर पर भी पड़ सकता है।
मोटापा
जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है, उनमें फैटी लिवर का खतरा अधिक देखा जाता है।
डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल
ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन भी लिवर की समस्या को बढ़ा सकता है।
फैटी लिवर के लक्षण
फैटी लिवर के शुरुआती चरण में कई बार कोई खास लक्षण नहीं दिखाई देते।
लेकिन कुछ लोगों में ये समस्याएं हो सकती हैं—
* थकान
* कमजोरी
* भूख कम लगना
* पेट में असहजता
* वजन में बदलाव
अगर समस्या बढ़ती है तो लिवर में सूजन और दूसरी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।
फैटी लिवर की जांच कैसे होती है?
फैटी लिवर की पुष्टि के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच कर सकते हैं।
अल्ट्रासाउंड
लिवर में फैट की मात्रा जानने के लिए अक्सर अल्ट्रासाउंड कराया जाता है।
ब्लड टेस्ट
लिवर एंजाइम और अन्य स्वास्थ्य संकेतों की जांच के लिए रक्त परीक्षण किया जा सकता है।
अन्य जांच
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आगे की जांच भी सलाह दे सकते हैं।
लिवर को स्वस्थ रखने के आसान तरीके
फैटी लिवर से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
संतुलित भोजन लें
हरी सब्जियां, फल, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन को अपनी डाइट में शामिल करें।
रोजाना व्यायाम करें
कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि लिवर समेत पूरे शरीर के लिए फायदेमंद हो सकती है।
वजन नियंत्रित रखें
अगर वजन ज्यादा है तो धीरे-धीरे वजन कम करना लिवर की सेहत सुधारने में मदद कर सकता है।
शराब से दूरी बनाएं
शराब का सेवन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे बचना लिवर के लिए बेहतर होता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर आपको लगातार थकान, पेट में परेशानी, वजन में अचानक बदलाव या कोई अन्य समस्या महसूस हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लें।
खासकर डायबिटीज, मोटापा या कोलेस्ट्रॉल की समस्या वाले लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।