हेल्थ | क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे किडनी के कार्य को प्रभावित करती है और समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा हो सकती है। हालांकि, इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं और इसके कारण मरीज अक्सर ध्यान नहीं देते। इस वजह से CKD की पहचान अक्सर देरी से होती है। मगर, अगर इसका समय रहते पता चल जाए, तो इसके गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी को रोकने के लिए शुरुआती निदान और जीवनशैली में बदलाव बहुत महत्वपूर्ण हैं। CKD की पहचान आमतौर पर रक्त और मूत्र परीक्षण से होती है, जिनमें किडनी की कार्यक्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति उच्च रक्तचाप, मधुमेह, या फैमिली हिस्ट्री का सामना कर रहा है, तो उसे नियमित रूप से किडनी के कार्यों की जांच करानी चाहिए। CKD के कुछ
प्रमुख लक्षणों में थकान, हाथ-पैरों में सूजन, मूत्र में बदलाव, और उच्च रक्तचाप शामिल हैं। शुरुआती चरणों में इन लक्षणों का कोई खास प्रभाव नहीं दिखता, लेकिन समय के साथ किडनी के कार्यों में गिरावट हो सकती है। यदि इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह स्थिति किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है, जो जीवन के लिए खतरे का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, और रक्तचाप व शुगर का नियंत्रण CKD के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। साथ ही, शराब और तंबाकू का सेवन भी किडनी की सेहत को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इनसे बचना चाहिए।
समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप से किडनी को नुकसान से बचाया जा सकता है और मरीज को लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीने का मौका मिल सकता है। यदि आप या आपके परिवार में किसी को CKD के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उचित परीक्षण करवाएं।