बच्चा बार-बार बोले ‘मुझे बोर हो रहा है’, स्क्रीन देने के बजाय अपनाएं ये आसान तरीके
Life Style : बच्चों का बार-बार “मुझे बोर हो रहा है” कहना लगभग हर घर की सामान्य बात है। छुट्टी का दिन हो, स्कूल से आने के बाद का समय हो या वीकेंड, कुछ समय खाली मिलते ही बच्चे अक्सर माता-पिता से शिकायत करने लगते हैं कि उनके पास करने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे में कई माता-पिता सबसे आसान रास्ता अपनाते हुए बच्चे के हाथ में मोबाइल दे देते हैं या टीवी चला देते हैं। इससे बच्चा कुछ समय के लिए शांत और व्यस्त जरूर हो जाता है, लेकिन अगर हर बार बोरियत दूर करने का तरीका स्क्रीन ही बन जाए तो यह आदत धीरे-धीरे बढ़ सकती है।
बच्चों का बोर होना हमेशा खराब नहीं होता। कई बार खाली समय ही बच्चे को खुद से सोचने, नया खेल बनाने, कहानी गढ़ने या किसी रचनात्मक गतिविधि में शामिल होने का मौका देता है। इसलिए बच्चे के बोर होने की शिकायत सुनते ही उसे मोबाइल थमाने के बजाय थोड़ा समय देना बेहतर हो सकता है।
अगर बच्चा कहता है कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या करे, तो माता-पिता सीधे समाधान देने के बजाय उससे कुछ विकल्प पूछ सकते हैं। जैसे वह ड्राइंग करना चाहता है, ब्लॉक्स से कुछ बनाना चाहता है, कोई कहानी पढ़ना चाहता है या घर के किसी छोटे काम में मदद करना चाहता है। इससे बच्चे को खुद निर्णय लेने की आदत भी पड़ती है।
घर में एक छोटा सा “एक्टिविटी कॉर्नर” बनाया जा सकता है। इसमें रंग, कागज, पेंसिल, पजल, ब्लॉक्स, क्राफ्ट सामग्री और उम्र के हिसाब से किताबें रखी जा सकती हैं। जब बच्चा बोर हो तो उसे इसी जगह से अपनी पसंद की कोई गतिविधि चुनने दें। इससे हर बार माता-पिता को नई चीज सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी और बच्चा खुद अपने समय का इस्तेमाल करना सीखेगा।
बच्चों को आउटडोर खेलों के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए। अगर आसपास पार्क है तो साइकिल चलाना, दौड़ना, फुटबॉल या बैडमिंटन खेलना अच्छे विकल्प हो सकते हैं। बाहर खेलना केवल बोरियत दूर नहीं करता, बल्कि शरीर को सक्रिय रखने में भी मदद करता है।
अगर बाहर जाना संभव न हो तो घर के अंदर भी कई मजेदार गतिविधियां की जा सकती हैं। जैसे कुशन से छोटा सा बाधा मार्ग बनाना, म्यूजिक पर डांस करना, छुपन-छुपाई खेलना या कमरे में ट्रेजर हंट तैयार करना। ऐसी गतिविधियां स्क्रीन के मुकाबले ज्यादा इंटरैक्टिव होती हैं।
बच्चों को घर के छोटे कामों में शामिल करना भी अच्छा तरीका हो सकता है। खिलौने व्यवस्थित करना, किताबें शेल्फ में लगाना, पौधों को पानी देना, खाने की टेबल लगाने में मदद करना या कपड़ों को अलग-अलग रखना जैसी छोटी जिम्मेदारियां उन्हें व्यस्त भी रखती हैं और उनमें जिम्मेदारी का भाव भी बढ़ाती हैं।
पढ़ने की आदत भी बोरियत दूर करने का अच्छा विकल्प है। जरूरी नहीं कि बच्चा हमेशा पढ़ाई से जुड़ी किताब ही पढ़े। कॉमिक्स, चित्रों वाली कहानियां, पहेलियां या बच्चों की पत्रिकाएं भी उसकी रुचि बढ़ा सकती हैं।
माता-पिता बच्चे से कह सकते हैं कि वह खुद एक कहानी बनाए और शाम को परिवार को सुनाए। इससे उसकी कल्पनाशक्ति और भाषा दोनों पर काम होता है। छोटे बच्चों से तस्वीर देखकर कहानी बनवाना भी काफी मजेदार गतिविधि हो सकती है।
बोरियत दूर करने के लिए हर बार नया खिलौना खरीदना भी जरूरी नहीं है। पुराने खिलौनों को नए तरीके से इस्तेमाल करना, खाली डिब्बों से घर बनाना, पुराने अखबार से क्राफ्ट बनाना या इस्तेमाल न होने वाली चीजों से मॉडल तैयार करना भी बच्चों को लंबे समय तक व्यस्त रख सकता है।
एक आसान तरीका “बोरियत जार” भी है। एक जार में छोटी पर्चियों पर अलग-अलग गतिविधियां लिख दें। जैसे 10 मिनट ड्राइंग, पांच मिनट डांस, पजल हल करना, खिलौनों से कहानी बनाना, कमरे में पांच चीजें ढूंढना या पौधों की देखभाल करना। बच्चा जब भी बोर होने की शिकायत करे, जार से एक पर्ची निकाल सकता है।
स्क्रीन टाइम को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। मोबाइल, टीवी और टैबलेट आज बच्चों की जिंदगी का हिस्सा हैं और सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएं तो सीखने में भी मदद कर सकते हैं। जरूरी यह है कि स्क्रीन का समय तय हो और बच्चे को यह आदत न पड़े कि खाली समय का मतलब सिर्फ मोबाइल है।
अगर बच्चा हर बार मोबाइल मांगता है तो अचानक पूरी तरह रोकने के बजाय धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम किया जा सकता है। उदाहरण के लिए पहले 10 मिनट कम करें और उसकी जगह कोई पसंदीदा गतिविधि जोड़ें। इससे बदलाव बच्चे के लिए आसान रहेगा।
माता-पिता को अपने व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर घर के बड़े सदस्य हर खाली समय में मोबाइल देखते हैं तो बच्चा भी वही सीखता है। इसलिए परिवार में कुछ समय ऐसा तय किया जा सकता है जब सभी लोग फोन दूर रखें और साथ में बातचीत, गेम या कोई दूसरी गतिविधि करें।
यह भी जरूरी है कि माता-पिता हर बार बच्चे का मनोरंजन करने की जिम्मेदारी खुद न लें। बच्चे को कुछ समय अकेले खेलने देना भी जरूरी है। शुरुआत में वह बार-बार बुला सकता है, लेकिन धीरे-धीरे वह खुद से समय बिताना सीख सकता है।
अगर बच्चा लगातार सिर्फ स्क्रीन में रुचि दिखाता है और दूसरी किसी भी गतिविधि में दिलचस्पी नहीं लेता, तो उसकी दिनचर्या में छोटे बदलाव लाना उपयोगी हो सकता है। तय समय पर आउटडोर खेल, पढ़ने का समय और बिना स्क्रीन वाला पारिवारिक समय शामिल किया जा सकता है।
बच्चे की उम्र के हिसाब से उसे खाली समय का इस्तेमाल करना सिखाना जरूरी है। छोटे बच्चों के लिए रंग भरना और ब्लॉक्स अच्छे विकल्प हैं, जबकि बड़े बच्चे कहानी लिखना, DIY प्रोजेक्ट बनाना, बोर्ड गेम खेलना या नई स्किल सीखना पसंद कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, बच्चे का “मुझे बोर हो रहा है” कहना हमेशा परेशानी की बात नहीं है। यह उसके लिए खुद से कुछ नया खोजने का मौका भी हो सकता है। हर बार मोबाइल या टीवी देने के बजाय उसे सोचने, खेलने और रचनात्मक गतिविधियां करने का अवसर दें।
माता-पिता का थोड़ा धैर्य बच्चे को यह सीखने में मदद कर सकता है कि खाली समय भी मजेदार हो सकता है और मनोरंजन के लिए स्क्रीन ही एकमात्र विकल्प नहीं है।