नई दिल्ली। दुनियाभर में बच्चों और किशोरों में बढ़ता मोटापा गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों ने इस समस्या की भयावह स्थिति को सामने रखा है। वर्ष 2024 में दुनिया भर में पांच से 19 वर्ष की उम्र के लगभग 17 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे से प्रभावित पाए गए। इनमें पांच से नौ वर्ष की उम्र के सात करोड़ बच्चे और 10 से 19 वर्ष के करीब 10 करोड़ किशोर शामिल हैं। बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार इसके प्रबंधन और उपचार के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में बच्चों के खानपान, शारीरिक गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली में सुधार को सबसे अधिक महत्व दिया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 7 अक्टूबर 2026 को जारी नई गाइडलाइन में स्पष्ट किया है कि बच्चों में मोटापे का इलाज केवल दवाओं या सर्जरी के माध्यम से नहीं किया जाना चाहिए। खासकर 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए वजन घटाने वाली दवाओं और सर्जरी की सिफारिश नहीं की गई है। वहीं 10 से 19 वर्ष के किशोरों में भी विशेष परिस्थितियों और विशेषज्ञों की निगरानी में ही इन विकल्पों पर विचार करने को कहा गया है।
1990 के मुकाबले चार गुना बढ़ा बच्चों में मोटापा
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पिछले तीन दशकों में बच्चों और किशोरों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 1990 में पांच से 19 वर्ष की आयु के लगभग दो प्रतिशत बच्चे मोटापे से प्रभावित थे, लेकिन 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर आठ प्रतिशत पहुंच गया।
इस तरह बच्चों में मोटापे का प्रसार चार गुना हो चुका है। वर्ष 1990 में दुनिया भर में करीब 3.1 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे से प्रभावित थे, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 17 करोड़ हो गई।इसके अलावा पांच से 19 वर्ष की आयु के लगभग 40 करोड़ बच्चे और किशोर अधिक वजन की समस्या से प्रभावित पाए गए, जिनमें मोटापे से पीड़ित बच्चे भी शामिल हैं।नौ साल तक के बच्चों के लिए दवा और सर्जरी की सिफारिश नहींविश्व स्वास्थ्य संगठन ने नई गाइडलाइन में छोटे बच्चों के इलाज को लेकर विशेष सावधानी बरतने को कहा है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, जन्म से लेकर नौ वर्ष तक की उम्र के बच्चों में मोटापे के उपचार के लिए वजन घटाने वाली दवाओं, बैरिएट्रिक सर्जरी और वजन नियंत्रित करने वाले उपकरणों की सिफारिश नहीं की जाती।इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधियां, पर्याप्त नींद और व्यवहार संबंधी सुधार को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
संगठन का कहना है कि कम उम्र में मोटापे के उपचार का उद्देश्य केवल वजन कम करना नहीं, बल्कि बच्चे की
शारीरिक
वृद्धि, मानसिक विकास और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाना होना चाहिए।
किशोरों में भी विशेष परिस्थितियों में मिलेगी दवा
डब्ल्यूएचओ ने 10 से 19 वर्ष के किशोरों के लिए अलग दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार, मोटापे से प्रभावित किशोरों में दवाओं के इस्तेमाल पर तभी विचार किया जा सकता है, जब विशेषज्ञों की निगरानी में चलाए गए आहार, व्यायाम और व्यवहार सुधार संबंधी कार्यक्रम से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हों।वहीं गंभीर मोटापे से प्रभावित किशोरों के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी पर भी कुछ विशेष और सख्त परिस्थितियों में विचार किया जा सकता है।
डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि ऐसी चिकित्सा प्रक्रियाएं सामान्य जीवनशैली सुधार का विकल्प नहीं हैं। किसी भी उपचार का फैसला बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति और विशेषज्ञ चिकित्सकों के मूल्यांकन के आधार पर किया जाना चाहिए।
बच्चों में मोटापा क्यों बन रहा गंभीर समस्या?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मोटापा एक जटिल और दीर्घकालिक बीमारी है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, आनुवंशिक प्रवृत्ति, सामाजिक परिस्थितियां और आसपास का वातावरण शामिल हैं।बच्चों की दिनचर्या में बदलाव और पौष्टिक भोजन की सीमित उपलब्धता भी इस समस्या को प्रभावित कर सकती है।
मोटापे के कारण बच्चों में कम उम्र से ही विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इनमें टाइप-2 डायबिटीज, हृदय संबंधी बीमारियां और अन्य गैर-संचारी रोग शामिल हैं।इसके अलावा अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित बच्चों को सामाजिक भेदभाव, उपहास और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।
खानपान और शारीरिक गतिविधियों में सुधार जरूरी
डब्ल्यूएचओ ने बच्चों और किशोरों में मोटापे के प्रबंधन के लिए संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधियों पर विशेष जोर दिया है।बच्चों के भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना लाभकारी हो सकता है। वहीं अत्यधिक शर्करा और अधिक ऊर्जा वाले कम पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना चाहिए।
इसके साथ बच्चों को उनकी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार नियमित खेलकूद तथा शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिलने चाहिए।संगठन ने लंबे समय तक निष्क्रिय बैठे रहने की आदतों को कम करने और पर्याप्त नींद को भी महत्वपूर्ण बताया है।
मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी
बच्चों में मोटापे के उपचार के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि मोटापे से प्रभावित बच्चों को शर्मिंदा करने, उनके वजन को लेकर नकारात्मक टिप्पणी करने या भेदभाव करने से बचना चाहिए।इसके बजाय परिवार, शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराएं।बच्चों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और उनकी मानसिक स्थिति को समझना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक सहायता और व्यवहार संबंधी परामर्श भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बच्चों में मोटापे को नियंत्रित करने के लिए परिवार की भागीदारी को आवश्यक बताया है।माता-पिता और देखभाल करने वाले सदस्य बच्चों की भोजन संबंधी आदतों, नियमित गतिविधियों और नींद की दिनचर्या को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डब्ल्यूएचओ ने डिजिटल माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी सहायता को भी कुछ परिस्थितियों में उपयोगी माना है। हालांकि, छोटे बच्चों के लिए ऐसे कार्यक्रम अभिभावकों या देखभाल करने वालों की निगरानी में ही संचालित किए जाने चाहिए।बच्चों पर वजन कम करने का दबाव बनाने के बजाय स्वस्थ आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करना अधिक महत्वपूर्ण है।सरकारों और स्कूलों को भी उठाने होंगे कदम
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि बच्चों में मोटापे की समस्या से निपटना केवल परिवार या चिकित्सकों की जिम्मेदारी नहीं है।सरकारों, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जिसमें बच्चों को पौष्टिक भोजन और सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों के अवसर आसानी से उपलब्ध हों।
स्कूलों में स्वस्थ भोजन की व्यवस्था, खेलकूद को प्रोत्साहन और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।संगठन ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करने की आवश्यकता जताई है, ताकि मोटापे से प्रभावित बच्चों को समय पर जांच, उपचार और आवश्यक सहायता मिल सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दी गंभीर चेतावनी
डब्ल्यूएचओ की नई गाइडलाइन बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोषण एवं खाद्य सुरक्षा विभाग की निदेशक डॉ. लूज मारिया डी रेगिल ने कहा कि बच्चों में मोटापे के उपचार की बुनियाद दवा या सर्जरी नहीं, बल्कि स्वस्थ भोजन, शारीरिक गतिविधियों और लंबे समय तक टिकने वाले व्यवहारिक बदलाव के लिए व्यापक सहायता उपलब्ध कराना है।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि समय रहते ध्यान नहीं देने पर बचपन का मोटापा वयस्क अवस्था तक बना रह सकता है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।ऐसे में अभिभावकों, शिक्षकों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों को मिलकर बच्चों की स्वस्थ जीवनशैली को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
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