लद्दाख में विकास को नई रफ्तार स्थानीय अधिकारों और निर्वाचित निकाय पर चर्चा
लेह: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ संवैधानिक सुरक्षा उपायों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा आगे बढ़ रही है। लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने गृह मंत्रालय (MHA) के साथ जारी उच्च-स्तरीय चर्चाओं और प्रस्तावित संवैधानिक ढांचे से संबंधित प्रगति का भी उल्लेख किया।मुख्य सचिव ने लेह में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि 15 अक्टूबर को लद्दाख के लोगों को समर्पित लगभग 3,350 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की जानकारी साझा की गई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ स्थानीय भूमि, प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण हैं।
₹640 करोड़ का नया लेह एयरपोर्ट टर्मिनल शुरू
लद्दाख में बुनियादी ढांचे के विकास के तहत लेह एयरपोर्ट के नए यात्री टर्मिनल को महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया गया है। लगभग 640 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस टर्मिनल का उद्घाटन 15 अक्टूबर को किया गया। यहां से 16 अक्टूबर से उड़ानें शुरू होने की जानकारी दी गई है। नया टर्मिनल प्रतिवर्ष लगभग 35 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता के अनुरूप तैयार किया गया है। इससे क्षेत्र में बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए हवाई कनेक्टिविटी का विशेष महत्व है। सर्दियों के दौरान मौसम और सड़क संपर्क प्रभावित होने की स्थिति में हवाई सेवाएं यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होती हैं। नए टर्मिनल से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और पर्यटन को बढ़ावा देने की उम्मीद है।
ज़ंस्कार की कनेक्टिविटी में सुधार
लद्दाख में सड़क संपर्क मजबूत करने के लिए भी कई परियोजनाओं पर जोर दिया गया है। मुख्य सचिव के अनुसार, ज़ंस्कार तक पहुंचने में लगने वाला यात्रा समय पहले लगभग 12 घंटे था, जो बेहतर कनेक्टिविटी के बाद करीब तीन घंटे रह गया है।इसके अलावा, 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दरचा सड़क परियोजना को भी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सड़क लद्दाख को वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध कराने के साथ रणनीतिक आवाजाही को मजबूत करने में मदद करेगी। इससे स्थानीय निवासियों, पर्यटकों और सुरक्षा बलों के आवागमन को लाभ मिलने की उम्मीद है।
9 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना शुरू
ऊर्जा क्षेत्र में भी लद्दाख को नई सुविधा मिली है। हानू जलविद्युत परियोजना की क्षमता नौ मेगावाट है। इसके शुरू होने से धा और हानू परियोजनाओं की संयुक्त क्षमता बढ़कर 18 मेगावाट हो गई है। क्षेत्र में जलविद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने से स्थानीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।लद्दाख में बिजली की उपलब्धता बेहतर बनाना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां की जलवायु, दूर-दराज की बस्तियां और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। ऊर्जा परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति मजबूत करने और विकास गतिविधियों को गति देने की संभावना है।
संवैधानिक सुरक्षा और निर्वाचित निकाय पर चर्चा
बुनियादी ढांचे के विकास के साथ लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों और लोकतांत्रिक व्यवस्था का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा के अनुसार, गृह मंत्रालय ने एक मसौदा ढांचा साझा किया है। इसमें संवैधानिक संशोधन और उसके बाद अनुच्छेद 240 के तहत नियम बनाए जाने की प्रक्रिया का प्रस्ताव शामिल है। इसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर निर्वाचित निकाय के गठन तथा स्थानीय भूमि, संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा से संबंधित व्यवस्था तैयार करना है।हालांकि, इस मसौदे को लेकर सहमति नहीं बनी है। 17 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधियों ने केंद्र के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। विवाद के प्रमुख मुद्दों में प्रस्तावित निर्वाचित निकाय की शक्तियां और स्थानीय लोगों को मिलने वाली स्वायत्तता शामिल हैं। इसलिए संवैधानिक सुरक्षा से जुड़ी चर्चा को अभी अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जा सकता।कुल मिलाकर, लद्दाख में सड़क, हवाई संपर्क और ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं के साथ स्थानीय अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर भी चर्चा जारी है। आने वाले समय में विकास परियोजनाओं के प्रभाव के साथ संवैधानिक ढांचे पर केंद्र और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच सहमति किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।