बिहार विधानसभा चुनाव 2025: कुछ घंटों बाद मतगणना होगी शुरू, किसकी बाज़ी लगेगी?

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Update: 2025-11-13 18:11 GMT
Bihar. बिहार। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में भभुआ विधानसभा सीट पर मतदान संपन्न हो गया है। जिले की यह शहरी विधानसभा सीट सासाराम लोकसभा क्षेत्र में आती है। इस बार भभुआ की राजनीति में खास मोड़ आया है, जहां प्रमुख मुकाबला बिहार के दो बड़े राजनीतिक दल, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच देखने को मिल रहा है। भभुआ विधानसभा सीट पर कुल 68.47 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव आयोग की जानकारी के अनुसार, मतदान शांतिपूर्ण रहा। मतगणना की प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है और 26-26 राउंड में वोटों की गिनती की जाएगी।
इस बार भभुआ विधानसभा सीट पर बीजेपी की ओर से भरत बिंद और राजद की ओर से वीरेंद्र कुशवाहा मैदान में हैं। चुनावी माहौल में इस बार की सबसे बड़ी चर्चा यही रही कि 2020 में राजद के लिए जीत हासिल करने वाले भरत बिंद ने इस बार पाला बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में भभुआ सीट से राजद के भरत बिंद ने बीजेपी की रिंकी रानी पांडेय को लगभग 10 हजार वोटों के अंतर से हराया था। उस चुनाव में भरत बिंद को 57,561 वोट मिले थे, जबकि रिंकी रानी पांडेय को 47,516 वोट मिले थे। हालांकि 2025 में इस सीट का समीकरण बदल गया है। इस बार राजद ने वीरेंद्र कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा इस चुनाव में पशुपति कुमार पारस की RLJP, विकास कुमार तिवारी, और आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर मोहम्मद अमीरुद्दीन अंसारी भी मैदान में हैं।
भभुआ विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो यहां कई बदलाव और महत्वपूर्ण घटनाएं देखने को मिली हैं। 1957 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के दुलार चन्द राम विधायक बने थे। इसके बाद 2015 में बीजेपी के आनंद भूषण पांडे ने चुनाव जीतकर विधायक पद संभाला। 2018 में उनकी मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी रिंकी रानी पांडे विधायक चुनी गईं। फिर 2020 के चुनाव में राजद के भरत बिंद ने जीत दर्ज की।
इस बार की चुनावी दौड़ में भभुआ के मतदाता मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं पहला विकास और सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता, और दूसरा स्थानीय राजनीतिक समीकरण, जिसमें भरत बिंद के पाला बदलने का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भभुआ में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस सीट पर मतदाता केवल दल के नाम से नहीं, बल्कि उम्मीदवार की छवि और पिछले कार्यकाल के प्रदर्शन के आधार पर निर्णय लेने जा रहे हैं। इस बार भभुआ का चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह सीट कैमूर जिले की शहरी विधानसभा है, और शहरी मतदाता अक्सर जागरूक और सक्रिय होते हैं।
बीजेपी और राजद के बीच मुख्य मुकाबला होने के साथ-साथ RLJP और AAP के उम्मीदवार भी कुछ प्रतिशत वोटों में इकट्ठा कर सकते हैं, जिससे चुनाव परिणाम पर असर पड़ सकता है। इस सीट पर पिछले चुनावों के आंकड़े और मतदाता प्रवृत्ति को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह मुकाबला बेहद रोमांचक रहने वाला है। भभुआ विधानसभा सीट पर मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की संख्या भी महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, यहां पुरुष और महिला मतदाता लगभग बराबर हैं, और युवा मतदाता संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इस बार युवा मतदाताओं के निर्णय से चुनावी परिणाम पर बड़ा असर पड़ सकता है।
चुनाव में सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बल तैनात रहे और चुनाव आयोग ने भी पूरे चरण में मतदान प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित की। इस बार के चुनाव में मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल बड़े उत्साह और जागरूकता के साथ कर रहे हैं। भभुआ विधानसभा चुनाव के नतीजे अब कुछ ही घंटों में आने वाले हैं। जैसे ही मतगणना पूरी होगी, यह स्पष्ट हो जाएगा कि 2025 में इस सीट की बाज़ी किसके हाथ लगी। चुनावी समीकरण और उम्मीदवारों के व्यक्तित्व के आधार पर यह कहा जा सकता है कि भभुआ की राजनीति इस बार और भी ज्यादा रोमांचक और प्रतिस्पर्धात्मक होने वाली है। भभुआ की राजनीतिक दुनिया के लिए यह सीट हमेशा से अहम रही है। 2025 के चुनाव में भी यहां के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे और यह तय करेंगे कि जिले में राजनीतिक सत्ता का झंडा किस दल के हाथ में जाएगा। इस बार भभुआ में मतदाता लोकतंत्र का सच्चा उत्सव मनाने जा रहे हैं और यह चुनाव न केवल इस विधानसभा सीट, बल्कि पूरे सासाराम लोकसभा क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण पर असर डालेगा।
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