श्रीनगर: बॉलीवुड से दूरी बना चुकीं अभिनेत्री ज़ायरा वसीम ने जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड के एक कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो का जिक्र करते हुए पूछा कि धार्मिक संस्था से जुड़े कार्यक्रमों में बच्चों, खासकर लड़कियों को डांस करवाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
ज़ायरा वसीम ने कहा कि वक्फ बोर्ड एक धार्मिक संस्था है, जिसका उद्देश्य समुदाय की सेवा और धार्मिक मूल्यों को बढ़ावा देना है। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसे संस्थानों को बच्चों को केवल मंच पर प्रदर्शन करने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सोचने, सीखने और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
यह विवाद स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़े एक कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ, जिसमें कुछ छात्राओं के डांस प्रदर्शन का वीडियो सामने आया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड से जुड़े एक स्कूल में आयोजित किया गया था।
ज़ायरा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उनका सवाल बच्चों से नहीं बल्कि उन संस्थानों और आयोजकों से है, जो इस तरह के कार्यक्रमों का फैसला लेते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर वही करते हैं जो स्कूल या संस्थान उनसे करवाते हैं।
उन्होंने कश्मीर की शैक्षणिक और बौद्धिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र की पुरानी परंपरा ज्ञान, शिक्षा और चरित्र निर्माण से जुड़ी रही है। ऐसे में संस्थानों को बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।
ज़ायरा वसीम ने 2019 में फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने का ऐलान किया था। वह आमिर खान की फिल्म 'दंगल' और 'सीक्रेट सुपरस्टार' से लोकप्रिय हुई थीं। उन्होंने अभिनय छोड़ने का कारण अपनी धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत विश्वासों से जुड़ा बताया था।
वहीं, वक्फ बोर्ड की ओर से इस टिप्पणी पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लोगों की अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग ज़ायरा के सवाल का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा बता रहे हैं।
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