मुंबई। साल 2005 में टीवी पर आए सिंगिंग रियलिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ ने कई नए कलाकारों को देशभर में पहचान दिलाई थी। इसी शो में काजी तौकीर और अरिजीत सिंह जैसे युवा कलाकारों ने हिस्सा लिया था। उस समय काजी अपनी अलग पर्सनैलिटी, स्टाइल और जबरदस्त लोकप्रियता के कारण दर्शकों के पसंदीदा कंटेस्टेंट बन गए थे। आखिरकार उन्होंने शो जीत लिया, जबकि अरिजीत सिंह प्रतियोगिता से पहले ही बाहर हो गए थे। आज अरिजीत भारतीय संगीत जगत के सबसे सफल गायकों में गिने जाते हैं। अब करीब 21 साल बाद काजी तौकीर ने अपने उस दौर को याद करते हुए स्वीकार किया है कि ‘फेम गुरुकुल’ के समय उनकी गायकी उतनी अच्छी नहीं थी।
काजी तौकीर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे अंतराल के बाद रियलिटी टीवी की दुनिया में उनकी वापसी हुई है और इसी के साथ उनके ‘फेम गुरुकुल’ के दिनों की चर्चा भी फिर शुरू हो गई है। काजी ने अपने पुराने सफर पर बात करते हुए अपनी गायकी की कमियों को खुले तौर पर स्वीकार किया।
‘मैं अच्छा नहीं गाता था’
काजी ने अपने पुराने प्रदर्शन को लेकर माना कि ‘फेम गुरुकुल’ में उनकी गायकी अच्छी नहीं थी। हालांकि वह लगातार मेहनत करते रहे और शो में आगे बढ़ते गए।
काजी के लिए यह सफर आसान नहीं था। शो में कई ऐसे प्रतियोगी मौजूद थे जो तकनीकी रूप से उनसे बेहतर गायक माने जाते थे। जजों की आलोचना का सामना करने के बावजूद काजी दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय होते चले गए।
उनकी खासियत केवल गायकी नहीं थी। उनकी पर्सनैलिटी, हेयरस्टाइल, बातचीत करने का अंदाज और स्टेज पर मौजूदगी उन्हें बाकी प्रतिभागियों से अलग बनाती थी। दर्शकों ने उन्हें भरपूर वोट दिए और यही समर्थन उन्हें आखिर तक ले गया।
अरिजीत सिंह भी थे उसी शो का हिस्सा
आज अपनी आवाज से करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करने वाले अरिजीत सिंह भी ‘फेम गुरुकुल’ के प्रतिभागी थे। उस समय अरिजीत युवा थे और संगीत की दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे।
अरिजीत प्रतियोगिता में छठे स्थान पर बाहर हो गए थे। दूसरी ओर काजी तौकीर और रूपरेखा बनर्जी आखिर में विजेता बने।
समय के साथ दोनों कलाकारों के करियर की दिशा बिल्कुल अलग हो गई। ‘फेम गुरुकुल’ जीतने के बाद काजी को जबरदस्त लोकप्रियता मिली, लेकिन वह लंबे समय तक मुख्यधारा की प्लेबैक सिंगिंग में वैसी जगह नहीं बना पाए जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी।
वहीं शो नहीं जीत पाने वाले अरिजीत ने आगे चलकर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई और हिंदी फिल्म संगीत के सबसे चर्चित गायकों में शामिल हो गए।
काजी की सबसे बड़ी ताकत थी पब्लिक कनेक्ट
‘फेम गुरुकुल’ के दौरान काजी तौकीर की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कमजोर प्रदर्शन के बाद भी दर्शकों के वोट उन्हें कई बार प्रतियोगिता में बनाए रखते थे।
उनका अंदाज बाकी प्रतियोगियों से अलग था। वह केवल गाना गाने के लिए स्टेज पर नहीं आते थे बल्कि दर्शकों का मनोरंजन भी करते थे। उनकी ऊर्जा और आत्मविश्वास ने युवाओं के बीच उन्हें खासा लोकप्रिय बना दिया था।
‘ओ मेरे दिल के चैन’ और ‘यम्मा यम्मा’ जैसी प्रस्तुतियों को लेकर भी काजी को याद किया जाता है। उनकी परफॉर्मेंस में गायकी के साथ मनोरंजन का तत्व भी दिखाई देता था।
21 साल बाद अपनी कमियों को स्वीकार करना उनके उस सफर को देखने का एक अलग नजरिया देता है। जिस समय लाखों दर्शक उन्हें वोट कर रहे थे, उस समय भी उनकी गायकी को लेकर सवाल उठते थे। अब खुद काजी ने माना है कि उनकी सिंगिंग में सुधार की काफी गुंजाइश थी।
जीत के बाद कहां गायब हो गए काजी?
‘फेम गुरुकुल’ जीतने के बाद काजी तौकीर रातोंरात स्टार बन गए थे। उनके पास लोकप्रियता थी और दर्शकों का बड़ा समर्थन था। शो के बाद रूपरेखा बनर्जी के साथ उनका एल्बम ‘जोड़ी नंबर 1’ भी आया।
इसके बावजूद उनका संगीत करियर उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाया जिसकी शो जीतने के बाद उम्मीद की जा रही थी।
दूसरी तरफ अरिजीत सिंह ने शुरुआती संघर्ष के बाद प्लेबैक सिंगिंग में कदम रखा। धीरे-धीरे उनकी आवाज बॉलीवुड फिल्मों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। ‘तुम ही हो’ जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई और उसके बाद उन्होंने लगातार कई सुपरहिट गाने दिए।
इस वजह से सोशल मीडिया पर अक्सर यह तुलना होती रही कि जिस शो में काजी विजेता बने थे, उसी शो से बाहर हुए अरिजीत आगे चलकर उनसे कहीं ज्यादा सफल हुए।
अरिजीत को लेकर काजी के मन में कोई कड़वाहट नहीं
दिलचस्प बात यह है कि करियर की इस तुलना ने दोनों की दोस्ती पर असर नहीं डाला। काजी तौकीर और अरिजीत सिंह आज भी अच्छे दोस्त हैं।
2026 में काजी ने अरिजीत के पश्चिम बंगाल स्थित जियागंज का दौरा भी किया था। दोनों की साथ घूमते और क्रिकेट खेलते तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे। काजी ने अरिजीत की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें बेहद साधारण और संगीत के प्रति समर्पित इंसान बताया था।
काजी ने कहा था कि अरिजीत में असुरक्षा, ईर्ष्या या घमंड जैसी चीजें नहीं हैं। उन्होंने अपने पुराने दोस्त को संगीत के प्रति पूरी तरह समर्पित कलाकार बताया था।
दोनों की दोस्ती इसलिए भी खास है क्योंकि मनोरंजन जगत में उनकी तुलना लगातार की जाती रही है। इसके बावजूद काजी ने कई मौकों पर साफ किया है कि उन्हें अरिजीत की सफलता से कोई परेशानी नहीं है।
अरिजीत भी नहीं भूले पुराने दोस्त को
काजी की वापसी के बीच अरिजीत सिंह ने भी अपने पुराने दोस्त के प्रति समर्थन दिखाया है। काजी के रियलिटी टीवी पर वापस आने के बाद अरिजीत ने उन्हें अपना ‘रॉकस्टार’ बताते हुए समर्थन किया।
यह दोनों की 2005 से चली आ रही दोस्ती की एक और झलक है। एक समय दोनों एक ही मंच पर अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे थे। बाद में दोनों ने बिल्कुल अलग-अलग रास्ते तय किए, लेकिन निजी रिश्ता कायम रहा।
‘फेम गुरुकुल’ की यादें फिर हुईं ताजा
काजी तौकीर की वापसी ने 2005 के ‘फेम गुरुकुल’ की यादों को फिर ताजा कर दिया है। उस दौर में सोशल मीडिया आज जितना प्रभावशाली नहीं था और टीवी रियलिटी शो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ करते थे।
काजी उस दौर के पहले बड़े रियलिटी टीवी सितारों में शामिल हो गए थे। उनकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि संगीत विशेषज्ञों की आलोचना के बावजूद जनता लगातार उन्हें वोट करती रही।
आज 21 साल बाद जब वह खुद कहते हैं कि उनकी गायकी अच्छी नहीं थी तो उनका बयान इसलिए दिलचस्प बन जाता है क्योंकि वह अपनी पुरानी सफलता को केवल गायकी की उपलब्धि के रूप में पेश नहीं कर रहे हैं।
उनकी बात से यह भी जाहिर होता है कि समय के साथ कलाकार अपने पुराने काम को अलग नजरिए से देख सकता है और अपनी कमजोरियों को स्वीकार कर सकता है।
काजी और अरिजीत की कहानी में बड़ा सबक
काजी तौकीर और अरिजीत सिंह का सफर यह भी दिखाता है कि किसी रियलिटी शो की जीत या हार किसी कलाकार के पूरे करियर का फैसला नहीं करती।
काजी उस प्रतियोगिता के विजेता बने और उन्हें तत्काल जबरदस्त प्रसिद्धि मिली। अरिजीत शो नहीं जीत सके, लेकिन वर्षों की मेहनत और संगीत के प्रति निरंतर समर्पण ने उन्हें देश के सबसे सफल गायकों में पहुंचा दिया।
वहीं काजी का सफर अलग रहा। अब 21 साल बाद उनकी वापसी ने एक बार फिर लोगों का ध्यान उनकी ओर खींचा है। खास बात यह है कि वह अपने अतीत को लेकर रक्षात्मक होने के बजाय अपनी कमियों को स्वीकार करते दिखाई दे रहे हैं।
आज जब लोग काजी और अरिजीत की सफलता की तुलना करते हैं तो दोनों की दोस्ती इस कहानी का सबसे सकारात्मक पहलू बनकर सामने आती है। शो का नतीजा चाहे जो रहा हो, दो दशक बाद भी दोनों के बीच दोस्ती कायम है और काजी अपने पुराने साथी की सफलता की खुले दिल से तारीफ करते हैं।