कॉमेडियन और अभिनेत्री मल्लिका दुआ अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में आ गई हैं। उन्होंने अस्पतालों में मरीजों को दिए जाने वाले शाकाहारी भोजन पर सवाल उठाते हुए मेन्यू को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। मल्लिका की टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। जहां कुछ यूजर्स ने अस्पतालों में मरीजों की पोषण संबंधी जरूरतों पर चर्चा की, वहीं कई लोगों ने उनकी टिप्पणी की आलोचना की।
मल्लिका दुआ ने अस्पताल में उपलब्ध भोजन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कथित तौर पर कहा, “दाल सूप से कोई ठीक नहीं हो रहा।” उनकी टिप्पणी का आशय अस्पतालों में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन में पर्याप्त पोषण और विकल्पों की जरूरत से जुड़ा बताया जा रहा है। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के पोषण को लेकर अपनी-अपनी राय साझा करनी शुरू कर दी।
कई यूजर्स ने मल्लिका की टिप्पणी से असहमति जताई। उनका कहना था कि दाल और अन्य शाकाहारी खाद्य पदार्थ प्रोटीन सहित कई पोषक तत्वों के स्रोत हो सकते हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अस्पताल का खाना मरीज की बीमारी, उपचार और डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के आधार पर तैयार किया जाता है। ऐसे में हर मरीज के लिए एक जैसा भोजन उपयुक्त नहीं माना जा सकता।
वहीं कुछ यूजर्स ने अस्पतालों में मरीजों के लिए अधिक विविध और संतुलित मेन्यू उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक मरीजों को बीमारी और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार पर्याप्त प्रोटीन, कैलोरी और दूसरे जरूरी पोषक तत्व मिलना महत्वपूर्ण है। हालांकि इसके लिए भोजन शाकाहारी हो या मांसाहारी, यह मरीज की जरूरत, पसंद और चिकित्सकीय सलाह पर निर्भर करता है।
पोषण विशेषज्ञ सामान्य तौर पर संतुलित आहार पर जोर देते हैं। दालें, फलियां, दूध और दुग्ध उत्पाद, सोया, मेवे और बीज जैसे कई शाकाहारी खाद्य पदार्थ प्रोटीन उपलब्ध करा सकते हैं। दूसरी ओर अंडे, मछली और मांस भी प्रोटीन के स्रोत हैं। किसी मरीज के लिए इनमें से क्या उपयुक्त है, इसका फैसला उसकी स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
मल्लिका दुआ की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में उन्हें ट्रोल किया, जबकि अन्य ने इसे अस्पतालों में पोषण की गुणवत्ता पर गंभीर चर्चा का मौका बताया।
फिलहाल यह बहस शाकाहारी बनाम मांसाहारी भोजन से आगे बढ़कर अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाले संतुलित और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तैयार भोजन पर केंद्रित हो गई है। किसी बीमारी से उबरने में भोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन इलाज का विकल्प नहीं है और मरीज की डाइट चिकित्सकीय सलाह के अनुसार तय की जानी चाहिए।
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