मनोरंजन :भारतीय फिल्म संगीत में डिस्को म्यूजिक को नई पहचान दिलाने वाले मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लहरी आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके गीत और संगीत आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। वर्ष 2022 में उनके निधन ने संगीत जगत को गहरा झटका दिया था। 15 फरवरी 2022 की रात उन्होंने अंतिम सांस ली और 69 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री, संगीत प्रेमियों और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई थी।
27 नवंबर 1952 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में जन्मे बप्पी लहरी का पूरा नाम आलोकेश लाहिड़ी था। संगीत उन्हें विरासत में मिला था। उनके पिता अपरेश लाहिड़ी प्रसिद्ध बंगाली गायक थे, जबकि उनकी मां बंसरी लाहिड़ी भी जानी-मानी गायिका और संगीतकार थीं। ऐसे माहौल में पले-बढ़े बप्पी लहरी ने बहुत छोटी उम्र से ही संगीत में रुचि दिखानी शुरू कर दी थी। महज तीन साल की उम्र में उन्होंने तबला बजाना सीख लिया था और धीरे-धीरे संगीत की बारीकियों में महारत हासिल की।
युवा अवस्था में वे अपने पिता के साथ विभिन्न संगीत कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे। एक कार्यक्रम के दौरान उनकी प्रतिभा से भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर भी प्रभावित हुई थीं। कहा जाता है कि उन्होंने बप्पी लहरी के उज्ज्वल भविष्य की भविष्यवाणी की थी। यह बात आगे चलकर पूरी तरह सच साबित हुई, जब बप्पी लहरी ने भारतीय फिल्म संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई।
अपने करियर की शुरुआत उन्होंने बंगाली फिल्मों से की। शुरुआती संघर्ष के बाद उन्हें संगीत निर्देशन का मौका मिला और उनकी प्रतिभा धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचने लगी। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों का रुख किया और 1970 के दशक में कई फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। हालांकि, असली सफलता उन्हें 1980 के दशक में मिली, जब उन्होंने बॉलीवुड में डिस्को म्यूजिक की नई लहर शुरू की।
उस दौर में जहां ज्यादातर फिल्में रोमांटिक और पारंपरिक धुनों पर आधारित गीतों से सजी होती थीं, वहीं बप्पी लहरी ने भारतीय संगीत में पश्चिमी डिस्को बीट्स का शानदार मेल पेश किया। उनके संगीत ने युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। "आई एम ए डिस्को डांसर", "जिम्मी जिम्मी आजा आजा", "रात बाकी", "यार बिना चैन कहां रे" और "तम्मा तम्मा" जैसे कई सुपरहिट गीत आज भी लोगों की पसंद बने हुए हैं।
बप्पी लहरी की एक और खास पहचान उनका अनोखा अंदाज था। सोने की भारी-भरकम चेन, अंगूठियां, काले चश्मे और हमेशा मुस्कुराता चेहरा उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता था। वे अक्सर कहते थे कि हॉलीवुड के कलाकार एल्विस प्रेस्ली से प्रेरित होकर उन्होंने सोना पहनना शुरू किया और यह उनकी पहचान बन गई।
साल 2022 की शुरुआत में उनकी तबीयत लगातार खराब रहने लगी थी। वे कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और अस्पताल में उनका इलाज भी चला। स्वास्थ्य में कुछ सुधार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया था, लेकिन 15 फरवरी 2022 की रात उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की वजह गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बताई गईं।
बप्पी लहरी ने अपने लंबे करियर में सैकड़ों फिल्मों में संगीत दिया और भारतीय फिल्म संगीत को एक नई दिशा प्रदान की। उनके योगदान ने न केवल बॉलीवुड बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय डिस्को संगीत को पहचान दिलाई। आज भी उनके गीत हर पीढ़ी के लोगों को थिरकने पर मजबूर कर देते हैं। संगीत जगत में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा और डिस्को किंग के रूप में उनकी पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।