प्रगतिशीलता का आवरण

ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति ने पिछले दिनों एक महिला को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया

Update: 2021-10-04 16:27 GMT

इसीलिए राष्ट्रपति कैस सईद ने जब नाजला बूदेन रमधाने को प्रधानमंत्री नियुक्त करने की घोषणा की, तो उससे कोई उत्साह का माहौल बना। सामान्य स्थितियों में इसे एक प्रगतिशील कदम समझा जाता। लेकिन आम राय यही बनी है कि राष्ट्रपति ने इस बिंदु पर प्रगतिशीलता का आवरण लिया है। 


ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति ने पिछले दिनों एक महिला को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। इसके तहत नाजला बूदेन रमधाने अब ट्यूनीशिया की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं। इसके पहले राष्ट्रपति तत्कालीन प्रधानमंत्री को दो महीने पहले बर्खास्त कर दिया था। साथ ही उन्होंने संसद भंग कर दी थी। उसके बाद उन्होंने एलान किया कि वे डिक्री से शासन करेंगे। यानी संविधान भी स्थगित कर दिया। इससे अरब वसंत के समय जिस एक देश में लोकतंत्र स्थापित हुआ, वहां भी व्यावहारिक रूप से उसका खात्मा हो गया। इसीलिए राष्ट्रपति कैस सईद ने जब नाजला बूदेन रमधाने को प्रधानमंत्री नियुक्त करने की घोषणा की, तो उससे कोई उत्साह का माहौल बना। सामान्य स्थितियों में इसे एक प्रगतिशील कदम समझा जाता। ट्यूनीशिया एक मुस्लिम देश है। दरअसल, वहां हुई नियुक्ति के तहत पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैँ। लेकिन आम राय यही बनी है कि राष्ट्रपति ने इस बिंदु पर प्रगतिशीलता का आवरण लिया है। इस ढाल के अंदर वे अपनी तानाशाही को छिपाना चाहते हैँ।

कैस सईद ने एक वीडियो संदेश में कहा कि ट्यूनीशिया के इतिहास में पहली बार, एक महिला प्रधानमंत्री सरकार का नेतृत्व करेगी। उन्होंने कहा देश की समस्याओं से निपटने के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता के साथ मिलकर काम करेंगे। गौरतलब है कि नाजला बूदेन एक अनजान महिला हैं। उनके बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं है। अब यह बताया गया है कि वह पेशे से इंजीनियरिंग स्कूल में पढ़ाती हैं और वर्ल्ड बैंक के लिए काम कर चुकी हैं। राष्ट्रपति ने भी नाजला को प्रधानमंत्री नियुक्त करने के अपने फैसले के बारे में भी कोई विशेष जानकारी नहीं दी। ट्यूनिशिया के मीडिया ने बताया है 63 वर्षीय नाजला का जन्म मध्य ट्यूनीशिया के कैरौन में हुआ था। उन्हें 2011 में उच्च शिक्षा मंत्रालय में महानिदेशक पद पर नियुक्त किया गया था। लेकिन उन्हें राजनीति में कोई विशेष अनुभव नहीं है। नाजला रमधाने ऐसे समय में एक उच्च राजनीतिक स्थान हासिल कर रही हैं, जब देश एक गंभीर राजनीतिक संकट में है। देश तानाशाही की तरफ है। 2019 के राष्ट्रपति चुनाव के पहले कैस सईद कानून के प्रोफेसर थे। उनसे बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई थीं। इसीलिए वाम मोर्चा और इस्लामी दलों समेत लगभग सभी राजनीतिक दलों ने उनको समर्थन दिया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद देश ने उनका दूसरा चेहरा देखा।


नया इण्डिया 
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