नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच होने वाली अहम बातचीत में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान **Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट** का मुद्दा भी शामिल हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक में रक्षा सहयोग को लेकर चर्चा के दौरान Su-57 की खरीद और तकनीकी सहयोग पर बात होने की संभावना जताई जा रही है।
रूस भारत को इस पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की पेशकश कर चुका है। रूस की ओर से संयुक्त उत्पादन और तकनीक सहयोग का प्रस्ताव भी दिया गया है। ([India Today][2]) ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर Su-57 में ऐसा क्या खास है, जो इसे दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल करता है?
क्या है Su-57 फाइटर जेट?
Su-57 रूस का **पांचवीं पीढ़ी (5th Generation) का स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट** है। इसे रूस की कंपनी सुखोई ने विकसित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के रडार से बचते हुए हवाई हमले करना, दुश्मन के विमानों को निशाना बनाना और जमीन व समुद्री ठिकानों पर हमला करना है।
यह विमान अमेरिका के F-35 और चीन के J-20 जैसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर विमानों की श्रेणी में आता है।
स्टील्थ तकनीक बनाती है सबसे खास
Su-57 की सबसे बड़ी ताकत इसकी **स्टील्थ क्षमता** है। इसका डिजाइन इस तरह बनाया गया है कि दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ न सकें।
स्टील्थ तकनीक के कारण यह विमान दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली के करीब जाकर भी मिशन को अंजाम देने में सक्षम माना जाता है।
इसमें खास आकार, रडार-अवशोषक सामग्री और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।
कितनी खतरनाक है इसकी क्षमता?
Su-57 को एक ऐसा विमान बनाया गया है जो कई तरह के युद्ध अभियानों को अंजाम दे सकता है।
इसकी प्रमुख क्षमताएं—
* हवा से हवा में हमला
* हवा से जमीन पर हमला
* दुश्मन के रडार सिस्टम को निशाना बनाना
* लंबी दूरी तक मिशन करना
* इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में इस्तेमाल
इसमें आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम और शक्तिशाली सेंसर लगाए गए हैं, जो पायलट को युद्ध के दौरान बेहतर जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
सुपरसोनिक स्पीड और लंबी रेंज
Su-57 की डिजाइन इसे तेज गति और बेहतर नियंत्रण क्षमता देती है। यह लंबी दूरी तक उड़ान भरने और तेज प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार किया गया है।
इसकी उच्च गतिशीलता (मैन्युवरेबिलिटी) इसे नजदीकी हवाई मुकाबले में भी मजबूत बनाती है।
भारत की Su-57 में क्यों रुचि?
भारत के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अपनी वायुसेना में आधुनिक लड़ाकू विमानों की संख्या और पांचवीं पीढ़ी की तकनीक की कमी है।
चीन के पास J-20 जैसे स्टील्थ विमान मौजूद हैं और पाकिस्तान भी आधुनिक लड़ाकू विमान हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा है। ऐसे में भारत अपनी हवाई क्षमता को मजबूत करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान **AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft)** भी विकसित किया जा रहा है, लेकिन उसके तैयार होने में समय लग सकता है।
पहले भी हो चुकी है Su-57 पर चर्चा
भारत और रूस पहले भी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर साथ काम करने की कोशिश कर चुके हैं। FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) परियोजना के तहत दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन बाद में भारत इस परियोजना से अलग हो गया था।
अब रूस ने दोबारा भारत के सामने Su-57 के लिए सहयोग और तकनीक साझा करने का प्रस्ताव रखा है।
भारत को क्या फायदा हो सकता है?
अगर भारत Su-57 खरीदता है या इसके उत्पादन में सहयोग करता है तो इससे कई फायदे हो सकते हैं—
1. पांचवीं पीढ़ी की क्षमता
भारत को पहली बार स्टील्थ फाइटर तकनीक मिल सकती है।
2. रक्षा उत्पादन में बढ़ावा
अगर तकनीक हस्तांतरण होता है तो भारत में विमान निर्माण क्षमता मजबूत हो सकती है।
3. चीन के मुकाबले रणनीतिक बढ़त
आधुनिक लड़ाकू विमान भारत की हवाई ताकत को बढ़ा सकते हैं।
रूस ने भारत के साथ संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग की संभावना जताई है।
क्या हैं चुनौतियां?
Su-57 को लेकर कुछ विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं। इनमें इसकी लागत, तकनीकी हस्तांतरण, रखरखाव और भारत के स्वदेशी AMCA कार्यक्रम पर असर जैसी बातें शामिल हैं।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी स्टील्थ विमान खरीदने से स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजना की गति प्रभावित हो सकती है।
F-35 और Su-57 में अंतर
दुनिया में अमेरिका का F-35 सबसे चर्चित पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। वहीं रूस का Su-57 उसकी जवाबी क्षमता के रूप में देखा जाता है।
F-35 को नेटवर्क आधारित युद्ध और स्टील्थ क्षमता के लिए जाना जाता है, जबकि Su-57 को तेज गति, हथियार क्षमता और मैन्युवरेबिलिटी के लिए मजबूत माना जाता है।
भारत के लिए फैसला क्यों अहम?
Su-57 की खरीद केवल एक विमान खरीदने का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत की भविष्य की रक्षा रणनीति से जुड़ा फैसला होगा।
भारत को यह तय करना होगा कि वह तत्काल जरूरत के लिए विदेशी स्टील्थ विमान ले या फिर अपने स्वदेशी AMCA कार्यक्रम पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करे।
फिलहाल PM मोदी और पुतिन के बीच होने वाली बातचीत पर रक्षा विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। अगर Su-57 को लेकर कोई बड़ा समझौता होता है तो यह भारत-रूस रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय साबित हो सकता है।
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