नई दिल्ली : क्लाइमेट एक्टिविस्ट और लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपनी 26 दिन से जारी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन के बाद लिया गया। सरकार ने आश्वासन दिया है कि NEET प्रश्न पत्र लीक मामले में कथित रूप से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर सकारात्मक विचार किया जाएगा। साथ ही देश की परीक्षा प्रणाली में सामने आई गड़बड़ियों और सुधारों पर संसद के मानसून सत्र में व्यापक चर्चा कराने का भी वादा किया गया है।
करीब चार सप्ताह तक चले इस अनशन के दौरान वांगचुक लगातार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग कर रहे थे। सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
अनशन समाप्त होने के बाद मेदांता अस्पताल की ओर से जारी एक वीडियो संदेश में 59 वर्षीय सोनम वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, लद्दाख एपेक्स बॉडी के प्रतिनिधियों के साथ देर रात उनसे मिले। इस दौरान सरकार की ओर से लिखित आश्वासन उन्हें सौंपा गया, जिसके बाद उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त करने का फैसला किया।
वांगचुक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को बढ़ाना नहीं था, बल्कि छात्रों, युवाओं और देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों की ओर सरकार और समाज का ध्यान आकर्षित करना था। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार अपने लिखित आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू करेगी और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करेगी।
केंद्र सरकार की ओर से जारी लिखित बयान में कहा गया कि सरकार उन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज न करने के पक्ष में है, जिन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च में भाग लिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रश्न पत्र लीक जैसी घटनाओं की रोकथाम और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने के लिए संसद में व्यापक बहस कराई जाएगी। इस चर्चा में विभिन्न पक्षों के सुझावों पर विचार किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
हाल के महीनों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेष रूप से NEET परीक्षा से जुड़े विवादों ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। प्रश्न पत्र लीक और कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर प्रमुखता से उठाया है।
सरकार ने अपने बयान में कहा कि हाल में NEET प्रश्न पत्र लीक मामले के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के विषय पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा। हालांकि, मुआवजे की राशि, पात्रता और प्रक्रिया को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तकनीकी सुधार, मजबूत निगरानी व्यवस्था, प्रश्न पत्रों की सुरक्षित गोपनीयता और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई आवश्यक है। छात्रों का विश्वास बनाए रखने के लिए परीक्षा प्रक्रिया का निष्पक्ष और विश्वसनीय होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सोनम वांगचुक के अनशन को देशभर के कई छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न नागरिक समूहों का समर्थन मिला था। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के लिखित आश्वासन और वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त करने के बाद अब सभी की निगाहें संसद के मानसून सत्र पर रहेंगी। यदि परीक्षा सुधारों और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होती है, तो भविष्य के लिए ठोस नीतिगत बदलावों का रास्ता खुल सकता है।
फिलहाल 26 दिनों तक चले इस अनशन के समाप्त होने से गतिरोध खत्म होता दिखाई दे रहा है। अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार अपने वादों को अमल में लाएगी और छात्रों के हितों, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।