नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) के कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास भी प्रदर्शनकारियों के साथ नजर आए। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली पुलिस की कड़ी पाबंदियों और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस तक पहुंचने में सफल रहे।जॉन ब्रिटास ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को कनॉट प्लेस पहुंचने से रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वे शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाके तक पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार की बात भी उठाई।
जॉन ब्रिटास बोले- हमने दिल्ली पुलिस की पाबंदी तोड़ी
तिरंगा मार्च में शामिल हुए सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने प्रदर्शनकारियों के कनॉट प्लेस पहुंचने को महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा था कि किसी को भी सीपी तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा। लेकिन हम यहां पहुंच गए हैं। हम शहर के बीचों-बीच आ गए हैं। हमने दिल्ली पुलिस को चुनौती दी है। हमने उनकी पाबंदी को तोड़ दिया है। हमने तिरंगे का मान रखा है। अब वे जो कर सकते हैं, कर लें।"ब्रिटास के इस बयान के बाद विरोध-प्रदर्शन और पुलिस की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।उन्होंने प्रदर्शनकारियों की भागीदारी का समर्थन करते हुए प्रशासनिक पाबंदियों पर सवाल उठाए।
चार छात्र और युवा संगठनों ने निकाला तिरंगा मार्च
दिल्ली में हुए इस विरोध-प्रदर्शन में वामपंथी छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए।इनमें SFI, DYFI, AISF और AIYF के कार्यकर्ता प्रमुख रूप से शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा लेकर मार्च किया और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।यह मार्च चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े विवादों को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आयोजित हुआ।प्रदर्शनकारी चुनावी पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
कनॉट प्लेस में भारी पुलिस बल तैनात
दिल्ली में तिरंगा मार्च को देखते हुए पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी।जानकारी के अनुसार, सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 25 हजार से अधिक जवानों की तैनाती की गई।इसके अलावा प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी बढ़ाई गई।दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई थी।
सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए किया गया बंद
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर के लिए बंद रखने का निर्णय लिया।यह कदम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च और उससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के बीच उठाया गया।दिल्ली पुलिस ने आयोजकों को बताया था कि बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।पुलिस ने भीड़ बढ़ने से यातायात प्रभावित होने और सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका जताई थी।
चुनाव आयोग के खिलाफ जारी है विरोध
दिल्ली में पिछले कई दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। वे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।वहीं, चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जाती है।शुक्रवार को हुए प्रदर्शन से पहले पुलिस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। इसके बावजूद कई लोग राष्ट्रीय ध्वज लेकर कनॉट प्लेस में एकत्र हुए।
विरोध के अधिकार और सुरक्षा व्यवस्था पर बहस
दिल्ली में तिरंगा मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच मतभेद सामने आए।एक ओर छात्र संगठन शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बता रहे हैं, वहीं दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था, यातायात और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्रतिबंधों का प्रमुख कारण बताया है।कनॉट प्लेस के व्यापारियों ने भी त्योहारी सीजन में लगातार हो रहे प्रदर्शनों से कारोबार प्रभावित होने की चिंता जताई है।जॉन ब्रिटास के बयान ने इस विवाद को नया राजनीतिक आयाम दिया है। उन्होंने पुलिस की पाबंदियों के बावजूद प्रदर्शनकारियों के कनॉट प्लेस पहुंचने का दावा किया है।फिलहाल प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
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