नई दिल्ली  : 29 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस और INDIA गठबंधन की महारैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। दिल्ली के प्रमुख बाजारों के व्यापारियों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अपील की है कि रामलीला मैदान में होने वाली इस रैली को दिवाली और भाई दूज के बाद आयोजित किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी खरीदारी के चरम समय में इतनी बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित होने से राजधानी के प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया है कि रैली के कारण यातायात प्रतिबंध और बाजारों तक पहुंचने में परेशानी होने पर 10 हजार करोड़ रुपये तक का व्यापार प्रभावित हो सकता है। हालांकि, यह संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं।
राहुल गांधी से 20 मिनट की मुलाकात की मांग
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने का आग्रह किया है। संगठन ने कांग्रेस नेतृत्व से 20 मिनट की मुलाकात का समय भी मांगा है, ताकि व्यापारी अपनी समस्याएं सीधे रख सकें।CTI के अनुसार, दिल्ली के करीब 20 प्रमुख बाजारों के प्रतिनिधि राहुल गांधी से मुलाकात करना चाहते हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कार्यक्रम आयोजित करते समय व्यापारियों और आम नागरिकों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।गोयल ने कहा कि व्यापारी टकराव नहीं, बल्कि बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जा सकता है।
दिवाली से पहले कारोबार प्रभावित होने की आशंका
दिल्ली के व्यापारियों के अनुसार, दिवाली और धनतेरस का समय पूरे वर्ष के कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है।इस वर्ष 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दिवाली और 10 नवंबर को भाई दूज का त्योहार है। इन त्योहारों से पहले दिल्ली के बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है।राजधानी के प्रमुख थोक बाजारों में दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में व्यापारी तथा ग्राहक खरीदारी करने पहुंचते हैं।व्यापारियों का कहना है कि 1 नवंबर को रैली आयोजित होने से सड़कों पर भीड़ बढ़ सकती है। सुरक्षा कारणों से बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंध लागू होने की स्थिति में ग्राहकों को बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।इससे कपड़ा, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान और अन्य त्योहारी वस्तुओं की बिक्री प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
चांदनी चौक और सदर बाजार सहित 20 बाजारों पर असर की चिंता
व्यापारिक संगठनों ने रामलीला मैदान के आसपास स्थित करीब 20 प्रमुख बाजारों के प्रभावित होने की आशंका जताई है।इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, दरियागंज, नई सड़क, किनारी बाजार, दरीबा कलां, फतेहपुरी, नया बाजार और अजमेरी गेट जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र शामिल हैं।CTI का कहना है कि इनमें से कई बाजार रामलीला मैदान से लगभग एक से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं।रैली में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के आने की संभावना के कारण आसपास की सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है।व्यापारियों को आशंका है कि इससे सामान की आपूर्ति और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होगी।
10 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का दावा
व्यापारिक संगठन CTI ने रैली के संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।संगठन के अध्यक्ष बृजेश गोयल का दावा है कि इस दौरान 10 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।उन्होंने कहा कि अक्टूबर में आयोजित कुछ प्रदर्शनों और यातायात प्रतिबंधों के कारण भी दिल्ली के व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा था।CTI के अनुसार, 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन तथा इसके बाद कुछ दिनों तक लागू प्रतिबंधों की वजह से लगभग तीन हजार करोड़ रुपये के कारोबारी नुकसान का अनुमान लगाया गया था।हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक आर्थिक प्रभाव रैली में पहुंचने वाली भीड़, यातायात व्यवस्था और प्रतिबंधों की अवधि पर निर्भर करेगा।
सदर बाजार के व्यापारियों ने भी जताई नाराजगी
सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने भी रैली की तारीख बदलने की मांग का समर्थन किया है।उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले का अंतिम सप्ताह व्यापारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान ग्राहक बड़ी संख्या में त्योहारी खरीदारी करने बाजारों में पहुंचते हैं।उनके अनुसार, 1 नवंबर दिवाली से पहले आखिरी रविवार होगा। ऐसे में रैली के चलते यातायात प्रभावित होने पर व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।पम्मा ने कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया कि व्यापारियों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए कार्यक्रम की तारीख पर दोबारा विचार किया जाए।व्यापारियों ने 26 अक्टूबर को कश्मीरी गेट इलाके में विरोध प्रदर्शन भी किया था।
INDIA गठबंधन की रैली का क्या है उद्देश्य?
कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली आयोजित करने की घोषणा की है।इस रैली का उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है।विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रहे हैं।कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के कारण लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।रैली के माध्यम से विपक्ष केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाबदेही की मांग करना चाहता है।
राहुल गांधी ने व्यापारियों की मांग पर दी प्रतिक्रिया
रैली स्थगित करने की मांग के बीच राहुल गांधी ने 26 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करें, तो विरोध प्रदर्शन बेहद कम समय में समाप्त हो सकता है।राहुल गांधी का यह बयान कांग्रेस के उस राजनीतिक अभियान से जुड़ा है, जिसमें पार्टी कथित मतदाता सूची अनियमितताओं के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है।दूसरी ओर, व्यापारियों का कहना है कि उनकी चिंता किसी राजनीतिक दल के विरोध से नहीं, बल्कि त्योहारों के दौरान व्यापार प्रभावित होने की आशंका से जुड़ी है।
रामलीला मैदान की जगह बदलने का भी सुझाव
व्यापारियों ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने रैली की तारीख बदलने के अलावा वैकल्पिक स्थान का सुझाव भी दिया है।CTI ने कहा है कि यदि कार्यक्रम स्थगित करना संभव नहीं है, तो इसे बुराड़ी मैदान या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे स्थानों पर आयोजित करने पर विचार किया जा सकता है।संगठन के अनुसार, इन स्थानों पर रैली आयोजित करने से पुरानी दिल्ली के घने व्यापारिक क्षेत्रों पर संभावित दबाव कम हो सकता है।हालांकि, किसी भी स्थान पर बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन के लिए सुरक्षा, यातायात और प्रशासनिक अनुमति संबंधी व्यवस्थाएं आवश्यक होंगी।
अब कांग्रेस नेतृत्व के फैसले पर निगाहें
दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर को कांग्रेस को 1 नवंबर की रैली आयोजित करने की अनुमति दी थी। इसके बाद पुलिस और यातायात विभाग की ओर से सुरक्षा तथा भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर समन्वय किया जा रहा है।इस बीच व्यापारिक संगठनों ने अपनी मांग दोहराते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।29 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रैली की तारीख में बदलाव की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।व्यापारियों का कहना है कि दिवाली के दौरान निर्बाध कारोबार सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। वहीं, विपक्ष इस रैली को लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता सूची से संबंधित चिंताओं को उठाने का महत्वपूर्ण मंच मान रहा है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस नेतृत्व व्यापारियों की अपील पर क्या निर्णय लेता है और प्रशासन रैली के दौरान आम नागरिकों तथा व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित होने से बचाने के लिए क्या व्यवस्थाएं करता है।
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