नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पार्टी की राज्यसभा सांसद डोला सेन की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के फैसले को चुनौती देती है। मामला कथित मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है, जिसमें ईडी ने कार्रवाई करते हुए खातों से डेबिट पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉज-लिस्ट के अनुसार, यह स्पेशल लीव पिटिशन जस्टिस एमएम सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के सामने सूचीबद्ध है।
टीएमसी ने अपनी याचिका में कलकत्ता हाई कोर्ट के 20 जुलाई के आदेश को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिका में दावा किया गया है कि बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई अनुचित और मनमानी है तथा इससे पार्टी के कामकाज पर असर पड़ रहा है।
यह पूरा मामला तृणमूल कांग्रेस के तीन एचडीएफसी बैंक खातों से जुड़ा है। ईडी ने इन खातों पर डेबिट रोक लगाई थी। जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के बाद की थी। इस मामले में ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की थी।
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि अंतरिम चरण में ईडी की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। हाई कोर्ट के जस्टिस कृष्णा राव की एकल पीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला या सुविधा-असुविधा का संतुलन नहीं दिखता है। इसलिए बैंक खातों को फ्रीज करने के खिलाफ तत्काल राहत नहीं दी जा सकती।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि ईडी ने जांच के दौरान पार्टी के बैंक खातों की पड़ताल की थी और कुछ संस्थाओं को बड़ी रकम ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें केयरवेल ग्रुप सहित कई संस्थाओं का नाम सामने आया था। अदालत ने कहा था कि इन लेन-देन की वैधता और अन्य पहलुओं की जांच आगे की प्रक्रिया में ही की जा सकती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि टीएमसी को अपनी आपत्तियां संबंधित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के सामने रखने का अधिकार है। हाई कोर्ट ने यह जानकारी भी दी थी कि ईडी ने केवल छह बैंक खातों को फ्रीज किया है, जबकि पार्टी के अन्य 36 बैंक खाते अभी भी संचालित हैं। इन खातों में 164 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा होने की बात कही गई थी।
ईडी की कार्रवाई कथित तौर पर करीब 164 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जांच के बाद की गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ वित्तीय गतिविधियों में अनियमितता और संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।
टीएमसी का कहना है कि ईडी ने किसी विशेष अपराध से जुड़ी राशि की पहचान किए बिना पूरे खातों पर रोक लगा दी, जो गलत है। पार्टी ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी की कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। वहीं, ईडी का कहना है कि कार्रवाई कानून के तहत की गई है और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर कदम उठाया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अदालत यह तय करेगा कि ईडी की कार्रवाई में हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं। इस मामले का असर आगे चलकर राजनीतिक दलों के बैंक खातों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है।