Delhi दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में बेड-एंड-ब्रेकफास्ट (B&B) प्रतिष्ठानों को नियंत्रित करने वाले 2007 के कानून को रद्द कर दिया है। इससे वह कानूनी ढांचा खत्म हो गया है जिसके तहत लगभग दो दशकों से ऐसी प्रॉपर्टीज़ का रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन होता था। दिल्ली विधानसभा द्वारा 11 अगस्त को पारित 'दिल्ली बेड एंड ब्रेकफास्ट एस्टेब्लिशमेंट्स (रिपील) एक्ट, 2026' को 24 अगस्त को उपराज्यपाल की मंज़ूरी मिली और 25 अगस्त को दिल्ली के राजपत्र (गज़ट) में प्रकाशित किया गया। हालांकि, यह कानून तभी से लागू होगा जब दिल्ली सरकार आधिकारिक राजपत्र में अलग से इसकी तारीख बताएगी।
नया कानून 'नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ़ दिल्ली (इनक्रेडिबल इंडिया) बेड एंड ब्रेकफास्ट एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2007' और इसके बाद 2009 और 2021 में हुए संशोधनों को रद्द करता है। इस कदम से 2007 के कानून के तहत बेड-एंड-ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन का मौजूदा कानूनी आधार खत्म हो जाता है। हालांकि, राजपत्र अधिसूचना में ऐसे व्यापक प्रावधान शामिल हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि कानून रद्द होने से पुराने कानून के तहत पहले से की गई कार्रवाइयों पर कोई असर न पड़े।
कानून के अनुसार, रद्द किए गए कानूनों के तहत दिए गए रजिस्ट्रेशन, जारी किए गए सर्टिफिकेट, जारी किए गए आदेश, दी गई मंज़ूरी और शुरू की गई कार्यवाही को तब तक संबंधित प्रावधानों के तहत ही माना जाएगा, जब तक कि वे नए कानून के खिलाफ न हों। कानून रद्द होने से पहले के कानूनों के तहत मिले अधिकारों, विशेषाधिकारों, दायित्वों या देनदारियों पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसे मामलों से जुड़ी जांच, कानूनी कार्यवाही या अन्य उपाय वैसे ही जारी रह सकते हैं जैसे कि कानून रद्द ही न किया गया हो।
यह कानून 'जनरल क्लॉज़ेज़ एक्ट, 1897' की धारा 6 का भी इस्तेमाल करता है, जो रद्द किए गए ढांचे के तहत हुई कार्रवाइयों और देनदारियों के लिए अतिरिक्त कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। राजपत्र में किसी वैकल्पिक रेगुलेटरी सिस्टम का ज़िक्र नहीं है, और नया कानून खुद केवल कानून रद्द करने और बदलाव के समय सुरक्षा उपायों का प्रावधान करता है। सरकार अधिसूचना के ज़रिए इसके लागू होने की तारीख अलग से तय करेगी।
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