स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026: बड़े शहरों में दिल्ली को 21वीं रैंक, श्रीनगर और बेंगलुरु भी पीछे
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में 21वां स्थान हासिल किया है। प्रदूषण के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाली दिल्ली ने इस बार वायु गुणवत्ता सुधार के लिए किए गए प्रयासों के आधार पर कई बड़े शहरों को पीछे छोड़ा है। सर्वेक्षण की रैंकिंग में श्रीनगर और बेंगलुरु जैसे शहर भी दिल्ली से नीचे रहे हैं।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहरों के प्रदूषण नियंत्रण उपायों, वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए गए कार्यों और स्थानीय स्तर पर लागू योजनाओं का मूल्यांकन किया जाता है। इस बार धूल नियंत्रण, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों को विशेष महत्व दिया गया।
10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में दिल्ली की 21वीं रैंक
केंद्र सरकार की ओर से जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 की सूची में दिल्ली को बड़े शहरों की श्रेणी में 21वां स्थान मिला है। यह श्रेणी उन शहरों के लिए है, जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है।
दिल्ली की रैंकिंग को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राजधानी लंबे समय से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझती रही है। सर्दियों के मौसम में यहां प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है और हवा की गुणवत्ता को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है।
इसके बावजूद सर्वेक्षण में दिल्ली ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों के आधार पर बेहतर प्रदर्शन किया है।
श्रीनगर और बेंगलुरु दिल्ली से पीछे
सर्वेक्षण में जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर को 26वां स्थान मिला है, जबकि कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु 32वें स्थान पर रहा है। दोनों शहर इस सूची में दिल्ली से पीछे रहे।
बेंगलुरु को देश के तेजी से विकसित होते महानगरों में गिना जाता है, जहां बढ़ते ट्रैफिक और शहरीकरण के कारण प्रदूषण की चुनौतियां बढ़ रही हैं। वहीं श्रीनगर में भी शहरी विस्तार और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण वायु गुणवत्ता को लेकर कई चुनौतियां सामने आती हैं।
धूल नियंत्रण पर दिया गया जोर
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहरों के प्रदर्शन को मापने के लिए कई मानकों को शामिल किया गया। इनमें सड़क और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के उपाय प्रमुख रहे।
दिल्ली सहित कई शहरों में निर्माण गतिविधियों के दौरान धूल रोकने, सड़कों की सफाई व्यवस्था सुधारने और खुले क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के लिए कदम उठाए गए हैं।
धूल को वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण माना जाता है। खासतौर पर बड़े शहरों में निर्माण कार्य और यातायात गतिविधियों के कारण हवा में धूल के कण बढ़ जाते हैं।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की कोशिश
सर्वेक्षण में वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए किए गए प्रयासों को भी प्रमुखता दी गई। शहरों में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने और यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने जैसे उपायों का मूल्यांकन किया गया।
दिल्ली में भी प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने, पुराने वाहनों पर नियंत्रण और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की निगरानी जैसे कदम उठाए गए हैं।
वायु गुणवत्ता सुधार के लिए लगातार प्रयास
देश के कई बड़े शहर वायु प्रदूषण की चुनौती से जूझ रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के जरिए शहरों के प्रयासों का मूल्यांकन किया जाता है और बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को प्रोत्साहित किया जाता है।
इस सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल रैंकिंग जारी करना नहीं, बल्कि शहरों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है।
दिल्ली के लिए राहत का संकेत
दिल्ली का 21वां स्थान हासिल करना राजधानी के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली को अभी भी वायु प्रदूषण की चुनौती से पूरी तरह निजात नहीं मिली है।
प्रदूषण के स्तर को स्थायी रूप से कम करने के लिए वाहनों की संख्या, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों और आसपास के राज्यों से आने वाले प्रदूषण स्रोतों पर लगातार काम करने की जरूरत है।
आगे भी जारी रखने होंगे प्रयास
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 की रैंकिंग से यह साफ है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों का असर दिखने लगा है। लेकिन बड़े शहरों में बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे विकास के कारण चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
दिल्ली सहित सभी महानगरों को बेहतर वायु गुणवत्ता के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि धूल नियंत्रण, स्वच्छ परिवहन व्यवस्था और प्रदूषण स्रोतों पर प्रभावी निगरानी से ही हवा की गुणवत्ता में स्थायी सुधार संभव है।
कुल मिलाकर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में दिल्ली की 21वीं रैंक राजधानी के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन प्रदूषण मुक्त शहर बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।