नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर चल रहे विवाद और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि वह केंद्र सरकार द्वारा गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर टास्क फोर्स की सिफारिशों का इंतजार करेगी, विशेष रूप से इस संबंध में कि भविष्य में NEET परीक्षा को ऑनलाइन मोड में आयोजित करने के लिए क्या सुझाव दिए जाते हैं।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को पारंपरिक ऑफलाइन (फिजिकल) मोड से ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित किया जाता है, तो केवल तकनीकी बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होगी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, "हमें साइबर सिक्योरिटी और डेटाबेस प्रोटेक्शन के लिए कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की जरूरत है।" अदालत ने संकेत दिया कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली अपनाने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष हो।
टास्क फोर्स की सिफारिशों पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से गठित हाई-पावर टास्क फोर्स इस दिशा में क्या सुझाव देती है, इसे ध्यान से देखा जाएगा। अदालत का मानना है कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली लागू करने से पहले विशेषज्ञों की राय और तकनीकी मूल्यांकन बेहद महत्वपूर्ण है।
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली इस टास्क फोर्स का गठन परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया गया है। समिति विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
नई व्यवस्था के लिए नए सुझाव जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव के लिए पारंपरिक उपायों से आगे बढ़कर नई सोच अपनानी होगी। अदालत ने कहा कि जब करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा को ऑनलाइन करने की बात हो रही है, तब तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ डेटा सुरक्षा और साइबर हमलों से बचाव के लिए भी ठोस व्यवस्था जरूरी है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन परीक्षा केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह भरोसे और विश्वसनीयता का भी प्रश्न है। इसलिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जिसमें पेपर लीक, डेटा चोरी या सिस्टम में किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न्यूनतम हो।
किस याचिका पर हो रही थी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट यह टिप्पणी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कर रहा था। यह याचिका NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद दायर की गई थी।
याचिका में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत से परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की थी।
पेपर लीक के बाद बढ़ी सुधार की मांग
देशभर में NEET परीक्षा को लेकर विवाद उस समय गहरा गया था, जब परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए। इसके बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे और विभिन्न स्तरों पर सुधार की मांग तेज हो गई।
इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेषज्ञों की हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन किया। समिति को परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ऑनलाइन परीक्षा के फायदे और चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली से प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा प्रबंधन और परिणाम प्रक्रिया में कई सुधार संभव हैं। इससे परीक्षा केंद्रों पर होने वाली कई समस्याओं को भी कम किया जा सकता है।
हालांकि, इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। देश के सभी क्षेत्रों में समान डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी, कंप्यूटर संसाधन, साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण जैसे मुद्दे बड़े पैमाने पर परीक्षा आयोजित करने से पहले सुलझाने होंगे।
पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख से यह स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक है, लेकिन किसी भी बदलाव से पहले उसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण होगा। अदालत ने संकेत दिया कि ऑनलाइन परीक्षा व्यवस्था तभी सफल मानी जाएगी, जब उसमें तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा पूरी तरह कायम रहे।
अब सभी की निगाहें नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि समिति की सिफारिशें भविष्य में NEET समेत अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट भी इन सुझावों का अध्ययन करने के बाद आगे की सुनवाई में अपना रुख तय करेगा।