Delhi दिल्ली। भारतीय रेलवे ने हरित और आधुनिक परिवहन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए शुक्रवार को दिल्ली और जींद के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल रन किया। इस परीक्षण के दौरान ट्रेन की तकनीकी क्षमता, सुरक्षा मानकों और परिचालन दक्षता का आकलन किया गया।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल रन के दौरान विशेष रूप से इमरजेंसी ब्रेकिंग दूरी (Emergency Braking Distance) और ऑसिलेशन (Oscillation) यानी गति के दौरान ट्रेन के संतुलन और कंपन की जांच पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ट्रेन उच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रदर्शन कर रही है।
हाइड्रोजन आधारित ट्रेनें पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल मानी जाती हैं। इनमें ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है। रेलवे भविष्य में ऐसी ट्रेनों के संचालन को बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। ट्रायल के दौरान रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम मौजूद रही, जिन्होंने ट्रेन के विभिन्न परिचालन पहलुओं का मूल्यांकन किया। परीक्षण से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
भारतीय रेलवे लंबे समय से ग्रीन एनर्जी और आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में प्रयासरत है। हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना को इसी पहल का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में रेल परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रेलवे अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि सफल परीक्षणों के बाद हाइड्रोजन ट्रेन सेवा को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न रूटों पर शुरू किया जा सकेगा।