भाजपा संगठन और मोदी सरकार में बड़े बदलाव की आहट, कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के संगठन और केंद्र सरकार के लिए आने वाला एक महीना राजनीतिक गतिविधियों से भरा रह सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विभिन्न मंत्रालयों और मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल और विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं। दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में भी लंबे समय से प्रतीक्षित नियुक्तियां होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सरकार या भाजपा ने अभी इन संभावित बदलावों को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
हाल में प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 20 केंद्रीय राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ लंबी बैठक कर उनके विभागों तथा सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की थी। करीब चार घंटे चली इस बैठक में योजनाओं के क्रियान्वयन, जमीनी परिणाम, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और विकसित भारत के लक्ष्य पर चर्चा हुई। मंत्रियों से भविष्य के लिए ठोस एवं व्यावहारिक सुझाव भी मांगे गए। आने वाले दिनों में समीक्षा की ऐसी और बैठकें हो सकती हैं।
इस बैठक की एक विशेष बात यह रही कि इसमें वरिष्ठ नौकरशाह मौजूद नहीं थे। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से सीधे संवाद कर उनके विभागों के प्रदर्शन और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। राजनीतिक जानकार इसे सरकार के कामकाज की समीक्षा के साथ मंत्रियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को परखने की कवायद के रूप में भी देख रहे हैं। इसी कारण केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित बदलाव की चर्चाओं को बल मिला है।
सूत्रों के आधार पर सामने आ रही खबरों के मुताबिक, फेरबदल में मंत्रालयों के पुनर्वितरण से लेकर कुछ नए चेहरों को सरकार में शामिल करने तक के विकल्पों पर विचार हो सकता है। कई वरिष्ठ मंत्रियों के पास एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में उनका कार्यभार कम कर दूसरे नेताओं को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। कुछ राज्य मंत्रियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पदोन्नति मिलने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में है।
संभावित फेरबदल में भाजपा को अपने सहयोगी दलों के साथ राजनीतिक संतुलन भी साधना होगा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में विभिन्न क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए मंत्रिपरिषद में बदलाव करते समय सहयोगी दलों के प्रतिनिधित्व, राज्यों की हिस्सेदारी और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखा जा सकता है। महिलाओं, युवाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाना भी नेतृत्व की प्रमुख प्राथमिकता रह सकती है।
आगामी विधानसभा चुनाव भी सरकार और संगठन के संभावित बदलावों का एक बड़ा आधार माने जा रहे हैं। जिन राज्यों में अगले वर्ष चुनाव होने हैं, वहां से नए चेहरों को केंद्र सरकार या राष्ट्रीय संगठन में स्थान देकर भाजपा राजनीतिक संदेश दे सकती है। अनुभवी नेताओं को चुनावी राज्यों की जिम्मेदारी सौंपने तथा स्थानीय सामाजिक समीकरणों के अनुसार रणनीति तैयार करने पर भी मंथन चलने की चर्चा है।
सरकार के साथ भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में भी बदलाव की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्था केंद्रीय संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में नए सदस्यों की नियुक्ति अथवा मौजूदा जिम्मेदारियों में फेरबदल हो सकता है। संसदीय बोर्ड संगठन के बड़े राजनीतिक निर्णयों में भूमिका निभाता है, जबकि केंद्रीय चुनाव समिति लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन पर अंतिम निर्णय लेती है।
भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध संसदीय बोर्ड की संरचना में राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हैं। संगठनात्मक बदलाव की स्थिति में अनुभव, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और चुनावी उपयोगिता को ध्यान में रखकर इसमें नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। पार्टी के कई नेताओं के नाम राजनीतिक चर्चाओं में हैं, लेकिन औपचारिक घोषणा होने तक इसे केवल संभावना के तौर पर ही देखा जा रहा है।
राज्यों के संगठन प्रभारियों और सह प्रभारियों की नियुक्ति भी जल्द हो सकती है। भाजपा में प्रदेश प्रभारी केंद्रीय नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संगठन की गतिविधियों, सरकार के साथ तालमेल, चुनावी तैयारी और स्थानीय नेताओं के बीच विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास रहती है। इसलिए आगामी चुनावों को देखते हुए इन नियुक्तियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनावी राज्यों के लिए अलग से चुनाव प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किए जाने की संभावना है। इन पदों पर आमतौर पर ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दी जाती है, जिन्हें चुनाव प्रबंधन, संगठन विस्तार और सामाजिक समीकरण साधने का अनुभव हो। पार्टी उम्मीदवारों के चयन से पहले जमीनी रिपोर्ट, बूथ प्रबंधन और प्रचार अभियान की दिशा तय करने में चुनाव प्रभारियों की अहम भूमिका होती है।
भाजपा के सामने सरकार की योजनाओं को मतदाताओं तक पहुंचाने के साथ संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय बनाए रखने की चुनौती है। पार्टी नए पदाधिकारियों के चयन में युवा और सक्रिय चेहरों को प्राथमिकता दे सकती है। इसके साथ ही अनुभवी नेताओं को रणनीतिक पदों पर बनाए रखते हुए नई पीढ़ी को संगठनात्मक जिम्मेदारी देने का प्रयास किया जा सकता है।
मंत्रिपरिषद में बदलाव की चर्चा पहले भी कई बार सामने आ चुकी है, लेकिन औपचारिक घोषणा नहीं हुई। इसलिए मंत्रियों की समीक्षा को सीधे फेरबदल का अंतिम संकेत मानना जल्दबाजी होगी। प्रधानमंत्री समय-समय पर मंत्रियों से संवाद कर सरकारी योजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते रहे हैं। इसके बावजूद समीक्षा बैठकों की आवृत्ति, आगामी चुनाव और संगठन में लंबित नियुक्तियों ने संभावित बदलाव की चर्चा को मजबूती दी है।
आने वाले सप्ताहों में यदि संगठनात्मक नियुक्तियां और मंत्रिपरिषद में फेरबदल होता है तो इसे भाजपा की चुनावी तथा प्रशासनिक रणनीति के बड़े पुनर्गठन के रूप में देखा जाएगा। फिलहाल सभी की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की अगली बैठकों तथा आधिकारिक घोषणाओं पर टिकी हुई है।