VVPAT पर्चियों पर समय दर्ज करने की मांग पर फैसला EC के हवाले, SC ने PIL पर दिया निर्देश

Update: 2026-05-27 10:54 GMT

New Delhi नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस जनहित याचिका (PIL) पर कोई सीधा आदेश देने से इनकार कर दिया, जिसमें वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) सिस्टम की गाइडलाइंस में बदलाव कर हर पर्ची पर वोट डाले जाने का सही समय दर्ज करने की मांग की गई थी। अदालत ने इस मामले में निर्णय लेने का अधिकार चुनाव आयोग (Election Commission) पर छोड़ दिया है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मुद्दा मुख्य रूप से तकनीकी प्रकृति का है और इसका संबंध चुनावी प्रक्रिया के तकनीकी संचालन से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस पर निर्णय लेना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है।

याचिका में मांग की गई थी कि VVPAT पर्चियों पर वोट डाले जाने का समय भी दर्ज किया जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यापन (verification) को और मजबूत किया जा सके। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इससे मतदाता और चुनाव व्यवस्था दोनों के बीच भरोसा और बढ़ेगा।

हालांकि, अदालत ने इस सुझाव को एक नीतिगत और तकनीकी निर्णय बताते हुए स्पष्ट किया कि इस पर कोई निर्देश जारी करना उचित नहीं होगा। बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग इस तरह के सुधारों पर विचार करने के लिए सक्षम संस्था है और वही इस पर अंतिम निर्णय ले सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर समय-समय पर विचार किया जाता है, लेकिन ऐसे बदलावों के लिए विशेषज्ञता और व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

इस फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि VVPAT पर्चियों में बदलाव को लेकर आगे की कार्रवाई और विचार-विमर्श चुनाव आयोग के स्तर पर ही किया जाएगा।

फिलहाल, इस मामले में कोई न्यायिक निर्देश जारी नहीं किया गया है और याचिका को चुनाव आयोग के पास भेजते हुए उस पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

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