नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पिछले चार-पांच दिनों से जारी बारिश ने नगर निकायों की तैयारियों और नालों की सफाई को लेकर किए गए दावों की पोल खोल दी है। मानसून से पहले नालों की सफाई पूरी करने और जलभराव से निपटने की तैयारियों के दावों के बावजूद दक्षिणी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली और बाहरी दिल्ली के कई इलाकों में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बन रही है। कई जगहों पर पानी सड़कों और गलियों में जमा होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जलभराव के कारण लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर सड़क पर जमा पानी को निकालने के लिए लोगों को अपने स्तर पर इंतजाम करना पड़ रहा है। कुछ इलाकों में लोग निजी खर्चे पर पंप लगाकर पानी निकालने को मजबूर हैं। इससे स्थानीय निवासियों पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
सफाई के दावों के बीच जलभराव
मानसून शुरू होने से पहले नगर निकायों की ओर से हर वर्ष नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं। इस बार भी नालों की सफाई का काम पूरा होने की बात कही गई थी। लेकिन लगातार बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव होने से इन दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नालों की सफाई सही तरीके से हुई होती और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त होती तो बारिश के बाद इतनी बड़ी मात्रा में पानी सड़कों पर नहीं जमा होता। कुछ जगहों पर नालों में गाद और कचरा जमा होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
मानसून में ही चल रहा निर्माण कार्य
जलभराव की समस्या को और गंभीर बनाने वाला एक प्रमुख कारण कई इलाकों में चल रहा निर्माण कार्य भी बताया जा रहा है। दक्षिणी दिल्ली के अलावा पूर्वी और बाहरी दिल्ली के कई हिस्सों में सीवर लाइन डालने तथा नालों की मरम्मत का काम मानसून के दौरान भी जारी है।
सीवर लाइन डालने के लिए सड़कों और आसपास के हिस्सों की खुदाई की गई है। वहीं कई जगहों पर नालों की मरम्मत और निर्माण कार्य भी चल रहा है। बारिश के दौरान इन निर्माण कार्यों के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे काम मानसून शुरू होने से पहले पूरे कर लिए जाते तो बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था पर इतना दबाव नहीं पड़ता। लेकिन निर्माण कार्य अधूरे रहने से कई जगह पानी निकलने का रास्ता बाधित हो रहा है।
निजी पंप से पानी निकालने को मजबूर लोग
जलभराव के बाद कई इलाकों में लोगों को अपने स्तर पर पानी निकालने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। कुछ स्थानों पर स्थानीय निवासियों ने निजी खर्च पर पंप लगाए हैं। इन पंपों की मदद से सड़क, घरों के आसपास और अन्य स्थानों पर जमा पानी बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।
लोगों का कहना है कि बारिश के बाद जलभराव से निपटना नगर निकायों की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद यदि उन्हें खुद पैसे खर्च कर पंप लगाकर पानी निकालना पड़े तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आवागमन में परेशानी
जलभराव का सबसे ज्यादा असर आम लोगों की आवाजाही पर पड़ रहा है। कई सड़कों पर पानी जमा होने से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और मुश्किल हो जाती है, क्योंकि सड़क पर जमा पानी की गहराई का अंदाजा लगाना कठिन होता है।
पैदल चलने वाले लोगों को भी पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। कई जगह जलभराव के कारण सड़क और नाले के बीच अंतर स्पष्ट नहीं रहता, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
सीवर और नाला निर्माण में तालमेल का सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीवर लाइन डालने और नालों की मरम्मत जैसे कामों में विभिन्न एजेंसियों के बीच पर्याप्त तालमेल नहीं है। एक तरफ जल निकासी व्यवस्था सुधारने के लिए काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्यों के कारण मौजूदा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
मानसून के दौरान बारिश बढ़ने पर यह समस्या और गंभीर होने की आशंका है। यदि निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ और जल निकासी के वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
जलभराव से स्वास्थ्य संबंधी खतरा
बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। जलभराव के कारण गंदा पानी सड़कों पर फैल सकता है। इससे मच्छरों के पनपने और संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।
स्थानीय लोगों ने नगर निकायों से मांग की है कि जलभराव वाले इलाकों में तत्काल पानी निकालने की व्यवस्था की जाए और नालों की दोबारा सफाई कराई जाए। साथ ही अधूरे निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने की मांग भी उठ रही है।
आने वाले दिनों में चुनौती बढ़ने की आशंका
मानसून के दौरान दिल्ली में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना रहती है। ऐसे में पिछले चार-पांच दिनों की बारिश ने जिस तरह जल निकासी व्यवस्था की कमियों को उजागर किया है, उससे आने वाले दिनों को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
नगर निकायों के सामने अब जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल राहत देने के साथ-साथ नालों की सफाई और निर्माण कार्यों को व्यवस्थित करने की चुनौती है। लोगों का कहना है कि केवल बारिश के बाद पानी निकालना स्थायी समाधान नहीं है। जलभराव रोकने के लिए जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
फिलहाल राजधानी के कई हिस्सों में बारिश के कारण बने जलभराव ने मानसून से पहले की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नालों की सफाई पूरी होने के दावों के बावजूद यदि लोगों को अपने खर्च पर पानी निकालने के लिए पंप लगाना पड़ रहा है, तो यह नगर निकायों की कार्यप्रणाली और मानसून प्रबंधन की समीक्षा की जरूरत को साफ तौर पर सामने लाता है।